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खराब कीटनाशक से बर्बाद हो गई फसल, मुआवजा मांगा तो कृषि विभाग ने कहा, उपभोक्ता फोरम में कंपनी के खिलाफ दावा करें

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रतलाम में खराब कीटनाशक से फसल खराब होने पर जब कृषक ने मुआवजा मांगा तो कृषि विभाग ने कहा, आप उपभोक्ता फोरम में कंपनी के खिलाफ दावा करें. लेकिन उपभोक्ता फोरम ने कृषि विभाग द्वारा की गई जांच की लैब रिपोर्ट मांग ली. इसके बाद से ही किसान कृषि विभाग और जनसुनवाई के चक्कर पर चक्कर लगा रहा है.

हर मंगलवार को जिला मुख्यालय पर होने वाली जनसुनवाई में लोगों के आवेदन लेने वाले अधिकारी तो बदल जाते हैं लेकिन उन आवेदकों की समस्या वहीं के वहीं रह जाती है. रतलाम कलेक्ट्रेट में चल रही जनसुनवाई में 2 किसान अपनी अलग-अलग समस्या लेकर पहुंचे थे.

समस्या दोनों की अलग-अलग है लेकिन पीड़ा एक समान हैं. करीब 2 साल से लगातार जनसुनवाई और शासकीय दफ्तर में आ रहे इन किसानों को समस्या का समाधान नहीं मिला है. नगरा गांव के किसान प्यार सिंह और खेतलपुर गांव के किसान रामचंद्र ने बताया कि वह पूर्व कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के दौर से जनसुनवाई में आ रहे हैं.

खराब कीटनाशक की जांच रिपोर्ट देना भूल कृषि विभाग

जनसुनवाई में अपनी समस्या लेकर पहुंचे ग्राम नगरा के किसान प्यार सिंह ने खेत में दवा छिड़कने के लिए एक कंपनी की दवाई ली थी. जिसका बिल भी उनके पास है. उस दवाई को छिड़कने के बाद उनकी फसल बर्बाद हो गई. जिसके बाद उन्होंने कंपनी के साथ ही जनसुनवाई में पहुंचकर कलेक्टर को इसकी शिकायत की. तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर कृषि अधिकारियों ने फसल एवं खेत की जांच की और कीटनाशक कंपनी की दवाई से ही फसल खराब होना भी पाया.

लेकिन इस खराब फसल का सैंपल लेकर उसकी लैब टेस्ट रिपोर्ट लेना कृषि विभाग के अधिकारी भूल गए. जब कृषक ने मुआवजा मांगा तो उन्होंने कहा कि आप उपभोक्ता फोरम में कंपनी के खिलाफ दावा करें. किसान ने कंपनी के खिलाफ दावा भी किया लेकिन उपभोक्ता फोरम ने कृषि विभाग द्वारा की गई जांच की लैब रिपोर्ट मांग ली. इसके बाद से ही किसान कृषि विभाग और जनसुनवाई के चक्कर पर चक्कर लगा रहे हैं. जहां उन्हें केवल आश्वासन ही मिल पा रहा है.

मामले में कृषि विभाग की उपसंचालक नीलम सिंह ने बताया कि यह मामला दो साल पुराना है, इसलिए तत्कालीन अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई को दिखाना पड़ेगा. इसके बाद ही इस मामले का समाधान हो सकेगा.

आदिवासी किसान की जाती बदलकर खरीद ली जमीन

खेतलपुर गांव से आए आदिवासी किसान रामचंद्र ने बताया कि उसके पुरखों की जमीन गांव के ही एक व्यक्ति ने हड़प ली है. पिता के फर्जी हस्ताक्षर कर उनकी जाति को भील की बजाय बागरी लिखवा कर जमीन की रजिस्ट्री और नामांतरण करवा लिया गया. जबकि आदिवासी व्यक्ति की जमीन विशेष कारण और कलेक्टर के आदेश के बिना विक्रय या हस्तांतरित नहीं की जा सकती. किसान रामचंद्र ने बताया कि जनसुनवाई में चक्कर लगाने के बाद भी कोई समाधान नहीं मिला है.

वहीं रतलाम तहसीलदार ऋषभ ठाकुर ने बताया कि आवेदक का मामला राजस्व न्यायालय में चल रहा है. बहरहाल जनसुनवाई में आने वाले अधिकांश आवेदन राजस्व और किसानों से संबंधित ही होते हैं.

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