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दिसंबर-जनवरी में खेत की मेढ़ पर लगाएं फलदार पौधे, हर पेड़ से होगी लगभग लाखों की कमाई

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दिसंबर-जनवरी का ठंडा मौसम किसानों के लिए सिर्फ फसलों की देखभाल का समय नहीं बल्कि अतिरिक्त आय जोड़ने का बेहतरीन अवसर भी है. इस दौरान खेत की मेढ़, बगिया और खाली ज़मीन पर लगाए गए फलदार पौधे कम पानी, कम खर्च और सीमित देखरेख में अच्छा उत्पादन देते हैं जिससे आने वाले वर्षों में स्थायी कमाई का रास्ता खुलता है.खेत की मेड़ पर नींबू, अमरूद, आंवला, जामुन, बेर, और पपीता जैसे फलदार पौधे लगाकर किसान अतिरिक्त आय (₹50,000-₹1 लाख सालाना) कमा सकते हैं, साथ ही मिट्टी का कटाव रोकने और सुरक्षा के साथ-साथ यह बाउंड्री को मजबूत बनाते हैं। यह 50% सरकारी अनुदान के साथ एक टिकाऊ खेती का तरीका है।

खेत की मेड़ पर लगाएं ये 5 पेड़। मेड़ पर पेड़ लगाकर खेती से भी ज्यादा कमाई करें

दिसंबर-जनवरी का मौसम आमतौर पर किसानों के लिए रबी फसलों की देखरेख का समय माना जाता है. लेकिन कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यही अवधि भविष्य की स्थायी आमदनी की नींव रखने के लिए भी सबसे मुफ़ीद होती है. सर्दियों में तापमान अनुकूल रहने, मिट्टी में नमी बने रहने और सिंचाई की जरूरत कम होने के कारण फलदार पौधों का रोपण बेहद सफल रहता है. खेत की मेढ़, बगिया, घर के आसपास की खाली ज़मीन या अनुपयोगी पड़ी जगह पर यदि सही किस्म के फलदार पौधे लगाए जाएं तो बिना मुख्य फसल को नुकसान पहुंचाए किसान अपनी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर सकते हैं. यही कारण है कि अब परंपरागत खेती के साथ-साथ मेढ़ आधारित फल उत्पादन की ओर किसानों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है.

क्यों खास है दिसंबर–जनवरी में फलदार पौधों की रोपाई
कृषि जानकारों के अनुसार सर्दियों में रोपण किए गए पौधों की जड़ें तेजी से जमती हैं जिससे उनकी शुरुआती वृद्धि मजबूत होती है. इस मौसम में कीटों और रोगों का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम रहता है जिससे दवाइयों पर होने वाला खर्च घट जाता है. साथ ही कम वाष्पीकरण के कारण सिंचाई की आवृत्ति कम रखी जा सकती है जिससे पानी और श्रम दोनों की बचत होती है. यही वजह है कि कम लागत में बेहतर परिणाम पाने के लिए दिसंबर-जनवरी को आदर्श समय माना जाता है.

मेढ़ और बगिया के लिए उपयुक्त 5 फलदार पौधे
अमरूद, नींबू, पपीता, केला और आंवला ऐसे फलदार पौधे हैं जिन्हें खेत की मेढ़ या बगिया में आसानी से लगाया जा सकता है. अमरूद और नींबू को 6-8 घंटे की सीधी धूप और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी की जरूरत होती है. पपीता और केला कम समय में फल देने वाली फसलें हैं जिससे किसानों को जल्दी नकद आय मिलने लगती है. वहीं आंवला दीर्घकालीन निवेश है जो वर्षों तक लगातार उत्पादन देकर स्थायी मुनाफ़ा देता है.

कम देखरेख में बेहतर उत्पादन का तरीका
किसान अंशुमान सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि सर्दियों में लगाए गए छोटे पौधों को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती. महीने में 2–3 बार हल्की सिंचाई पर्याप्त रहती है. रोपण के समय गड्ढे में 10-20 किलो सड़ी हुई गोबर की खाद डालना लाभकारी होता है. पाले से बचाव के लिए पुआल, सूखी घास या मल्चिंग का उपयोग किया जा सकता है. अत्यधिक ठंड के दौरान भारी मात्रा में उर्वरक देने से बचना चाहिए और फरवरी से संतुलित खाद का प्रयोग शुरू करना बेहतर रहता है.

ग्राफ्टेड पौधों से जल्दी मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान नर्सरी से ग्राफ्टेड या कलमी पौधे लगाते हैं तो फल आने का समय काफी कम हो जाता है. उदाहरण के तौर पर नींबू और अमरूद के ग्राफ्टेड पौधे 1-3 साल में फल देने लगते हैं जबकि बीज से उगाए गए पौधों में 7-10 साल तक लग सकते हैं. आंवले के मामले में भी ग्राफ्टेड पौधे 3-5 साल में उत्पादन शुरू कर देते हैं.

मेढ़ आधारित फल खेती से बढ़ेगी किसानों की आय
कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि खेत की मेढ़ों पर फलदार पौधे लगाना जोखिम कम करने का कारगर तरीका है. इससे न केवल बेकार पड़ी ज़मीन का उपयोग होता है बल्कि लंबे समय तक स्थायी आय का स्रोत भी तैयार होता है. अनुमान है कि सही प्रबंधन के साथ आंवले की खेती से एक एकड़ में सालाना ₹1 से ₹2 लाख तक का मुनाफ़ा संभव है. कुल मिलाकर दिसंबर-जनवरी में थोड़ी सी समझदारी और सही योजना के साथ की गई फलदार पौधों की रोपाई किसानों के लिए भविष्य की आर्थिक मजबूती का रास्ता खोल सकती है.

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