Home खेती किसानी कृषि वार्ता मध्य प्रदेश के सरकारी गोदामों में रखे- रखे लाखों टन गेहूं सड़ा

मध्य प्रदेश के सरकारी गोदामों में रखे- रखे लाखों टन गेहूं सड़ा

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मध्य प्रदेश के सरकारी गोदामों में रखे- रखे लाखों टन गेहूं सड़ गए, जिससे उसमें कीड़े भी लग गए हैं. खास बात यह है कि अब यह गेहूं इंसान तो दूर मवेशियों के खाने लायक भी नहीं है. अधिकारियों की लापवाही के चलते वित्तीय और खाद्य सुरक्षा को भारी नुकसान हुआ है. अब कुछ लोग मध्य प्रदेश में खाद्य भंडारण की व्यवस्था पर भी सवाल उठा रहे हैं. कहा जा रहा है कि भारतीय खाद्य निगम ने इन सड़े हुए गेहूं को लेने से इनकार कर दिया था. उसने इसे खाने के लिए अनुपयुक्त बताया था. वहीं, मामले के उजागर होने के बाद जवाब में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं.

हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि क्या यह खराब गेहूं सार्वजनिक राशन प्रणाली के माध्यम से वितरण के लिए तैयार किया जा रहा था, जो संभवतः गरीबों की थाली तक पहुंचेगा? FCI के अनुसार मध्य प्रदेश में 10.64 लाख टन गेहूं अब मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त है. FCI ने कहा है कि इसमें से 6.38 लाख टन को बचाया जा सकता है लेकिन गुणवत्ता में काफी समझौता होगा. लेकिन बाकी को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया है.

एनडी टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि हाल ही में किए गए निरीक्षण में पता चला कि 2,600 टन गेहूं – जिसे 2018 और 2021 के बीच जबलपुर से खरीदा गया था और अशोकनगर में संग्रहीत किया गया था, वह भी इतनी खराब गुणवत्ता का था कि इसकी तुलना पशुओं के चारे से की गई. वहीं, गोदाम प्रबंधक उदय सिंह चौहान ने स्वीकार किया कि गेहूं तीन महीने पहले आया था, लेकिन गुणवत्ता खराब हो गई है.

जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई 

खास बात यह है कि खराब गेहूं प्रदेश के किसी एक या दो गोदामों या किसी खास क्षेत्र में नहीं पाया गया, बल्कि पूरे राज्य का यही हाल है. कहा जा रहा है कि प्रदेश के सभी गोदामों में सड़े हुए गेहूं पाए गए हैं. वहीं, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि हमें शिकायतें मिली हैं. चाहे गलती अधिकारियों की हो या गोदाम मालिकों की, मैंने सख्त और तत्काल जांच के लिए प्रमुख सचिव को पत्र लिखा है. जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

गेहूं में रेत और कंक्रीट 

यह घटनाक्रम विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि मध्य प्रदेश में 5.37 करोड़ परिवार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मुफ्त खाद्यान्न पर निर्भर हैं. इन कमजोर आबादी को अनुपयुक्त गेहूं के संभावित वितरण के विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं. पिछले साल फरवरी में सतना में सरकारी खरीदे गए गेहूं में रेत, कंक्रीट और मिट्टी की धूल मिलाने के आरोप में साइलो बैग स्टोरेज कंपनी के शाखा प्रबंधक सहित छह लोगों पर आरोप लगाया गया था.

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