बिरयानी की खुशबू वाली काली इलायची कभी भारत का ‘ब्लैक गोल्ड’ थी. जलवायु परिवर्तन और आनुवंशिक विविधता की कमी से भारत की खेती पिछड़ गई. नेपाल अब दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है. भारत को सालाना करोड़ों का नुकसान हुआ है. अब विज्ञान इस संकट से निपटने के लिए नई तकनीकें विकसित कर रहा है.
बिरयानी वेज होती है या नहीं इस बहस के बीच एक बात तो पक्की है कि जब बिरयानी की खुशबू आती है तो सबसे पहले ख्याल काली इलायची का आता है जो बिरयानी को सजाने के साथ उसका स्वाद भी बढ़ाती है. आपको पता है इसे ब्लैक गोल्ड कहते हैं और भारत इसकी खेती में नंबर वन था लेकिन नेपाल इसका दिग्गज खिलाड़ी बन रहा है. तो ऐसा क्या हुआ कि हम पीछे चले गए, कहां होती है इसकी खेती और साइंस इसमें क्या कमाल करने जा रहा है. चलिए समझते हैं. बिरयानी में डलती है बड़ी इलायची जो कभी सिक्किम की पहाड़ियों का “ब्लैक गोल्ड” थी, जिससे दुनिया की रसोइयां चलती थीं और किसान समृद्ध थे. आज दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं, मांग कायम है, फिर भी ये साम्राज्य ढह गया. बिरयानी के लिए भले ही हैदराबाद, लखनऊ या कोलकाता प्रख्यात हो
बड़ी इलायची की दूसरी फसल की आवक शुरू हो गई है। प्रतिकूल मौसम की वजह से फसल को नुकसान की आशंका से भावों में अधिक मंदी के संयोग कम बताए जा रहे हैं। उत्पादकों ने पिछले दिनों बिक्री रोक ली थी, इससे व्यापारिक क्षेत्रों में चिंताएं बढ़ गई थीं। उल्लेखनीय है कि बड़ी इलायची की दूसरी फसल को मुख्य फसल माना जाता है। पिछले दिनों सिक्किम दूसरी फसल का माल 550 रुपए किलो बिक गया था। इसके बाद भारतीय बाजारों में मंदी के बाद स्थिरता आ गई थी।
25 प्रतिशत फसल कम
प्राप्त जानकारी के अनुसार असम, सिक्किम, पश्चिम बंगाल जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में मौसम की खराबी की वजह से फसल को 25 से 30 प्रतिशत हानि होने की आशंका रखी जाने लगी है। पिछले दिनों औसत नीलामी में 450 से 625 रुपए में बिक्री थी। फिलहाल बाजारों में आंतरिक धारणा अधिक मंदी की नहीं है। मंदी-तेजी का आधार मांग पक्ष प्रमुख बन गया। मांग कमजोर रही तो कम उत्पादन के बाद भी तेजी आना संभव नहीं लगता है। वर्तमान में अनेक बाजारों की स्थिति यही है। स्टॉकिस्ट धीमी गति से खरीदी कर रहे हैं। जीएसटी लागू होने के बाद सामान्यत: बड़े स्टॉकिस्टों ने स्टाक करना ही बंद कर दिया है। इस वजह से भी बाजारों के हालात अधिक खराब हुए हैं। मसाला बोर्ड के अनुसार वर्ष 2017-18 में 56.46 करोड़ 760 टन बड़ी इलायची का निर्यात किया गया था। इससे एक वर्ष पूर्व 780 टन का निर्यात हुआ था।
खोपरा बूरा के भावों में मंदी आ गई है। ग्राहकी निकली तो भावों में स्थिरता आ सकती है। खोपरा बूरा ग्लोब असल 2150 नकली 1900 से 2000 रुपए ही रह गया। बेसन के भावों में कमी की गई है। खोपरा गोला एवं साबूदाना में मांग अटक गई है। शकर की आवक 8 ट्रक एवं 12 ट्रक का स्टॉक था। दालचीनी में सुधार रहा।
सियागंज बाजार में शकर 3310 से 3350 गुड़ लड्डू 3650 से 3700 कटोरा 3550 से 3600 भेली 3250 से 3300 तारा बर्फी 4200 लड्डू छोटा 4100 से 4150 हल्दी काढ़ी 11200 से 11400 लाल गाय 140 पावडर-501 1681 सुपर क्राउन 835 मयूर 1500 खोपरा गोला 192 से 207 खोपरा बूरा व्हील 3100 सनगोल्ड 2250 लक्ष्य 2300 ताज 2775 साबूदाना 4150 से 4200 मीडियम 4300 से 4400 बेस्ट 4450 से 4600 ग्लास 5350 से 5600 वरलक्ष्मी 5250 1 किलो पैकिंग में 5900 सोल्जर 4200 सच्चामोती 5075 1 किलो में 5750 सच्चासाबू 4900 1 किलो में 5500 कालीमिर्च गारवल 385 से 390 एटम 400 से 405 मटरदाना 440 से 450 जीरा राजस्थान 215 से 219 ऊंझा हल्का 222 से 228 मध्यम 235 से 240 बेस्ट 240 से 245 सौंफ मोटी 85 से 95 मीडियम 115 से 140 बेस्ट 170 से 190 बारीक 170 से 190 नारियल मद्रास नया पानी 120 भरती 1351 से 1375 160 भरती 1460 से 1475 200 भरती 1600 से 1651 250 भरती 1800 से 1850 लौंग चालू 550 से 560 बेस्ट 600 से 615 दालचीनी 185 से 190 बेस्ट 195 जायफल 575 बेस्ट 675 जावत्री 1350 से 1450 बड़ी इलायची 725 से 850 बेस्ट 925 से 950 बेस्ट 825 से 875 पत्थर फूल 325 से 375 बेस्ट 425 बाद्यान फूल 225 से 235 बेस्ट 245 से 255 शाहजीरा 300 से 350 ग्रीन 480 से 500 तेजपान 85 से 90 तरबूज मगज 141 से 143 नागकेसर 620 सौंठ 200 से 280 खसखस चालू 250 से 300 बेस्ट 325 से 375 एक्स्ट्रा बेस्ट 425 से 440 धौली मूसली 1100 से 1150 वनदेवी दाना 751- 2440 वनदेवी पाउच में 2460 121 न. दाना 2240 पाउच 2260 111 न. डिब्बी 2040 पाउच 2060 पीला पावडर 680 सिंदूर 6200 पूजा बादाम 70 से 85 बेस्ट 140 से 145 पूजा सुपारी 235 अरीठा 38 से 45 सिंघाड़ा 115 से 120 बड़ा 125 से 130 मोरधन अल्पाहार 6800 हरी इलायची 1250 से 1315 मीडियम बोल्ड 1460 से 1500 बोल्ड 1700 से 1750 एक्स्ट्रा बोल्ड 1850 काजू-240 920 से 960 काजू डब्ल्यू 320- 840 से 880 डब्ल्यू 1- 800 से 820 एसडब्ल्यू 300- 765 से 770 एसएस डब्ल्यू 750 से 760 काजू जेएच 785 से 810 टुकड़ी 745 से 755 बादाम मगज 795 से 710 नकद 720 से 725 मोटी 780 टॉच 600 खारक थोक में 5500 से 6500 मीडियम 7000 से 7700 बेस्ट 8000 से 9000 किशमिश कंधारी 275 से 350 बेस्ट 425 से 475 इंडियन 225 से 245 बेस्ट 260 से 280 चारोली 600 से 625 बेस्ट 675 से 725 मुनक्का 250 से 350 बेस्ट 400 से 600 अंजीर 800 से 850 बेस्ट 900 से 950 मखाना 670 से 695 बेस्ट 730 से 900 केसर 118 से 128 मैदा कट्टे में 1280 से 1320 रवा कट्टे में 1300 से 1380 आटा कट्टा 1150 से 1300 बेसन 2700 से 2900 बटाना बेसन 2600 से 2700 पोहा 4000 से 4200 रुपए।
लौंग का आयात महंगा
अमेरिकी डॉलर की तुलना में रुपया कमजोर होने से लौंग का आयात काफी महंगा पड़ने लगा है। इससे मंदी तो नहीं लग रही है। पिछले लंबे समय से लौंग में ग्राहकी कमजोर बनी हुई है, इससे आयात पड़तल ऊंची होने के बाद भी ग्राहकी नहीं निकल रही है। रुपया इसी तरह कमजोर होता रहा तो लौंग में आगे-पीछे तेजी आ सकती है।
