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किसानों की पहुंच से दूर कुसुम, सोलर प्लांट के लिए एक साल से धूल खा रहे हैं एक हजार किसानों के आवेदन

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भोपाल। प्रदेश के 1000 से अधिक किसान अपने खेतों में बिजली पैदा करना चाहते हैं, इसके लिए लाखों रुपए खर्च कर खेत तैयार किए, दस्तावेजों की कमी पूरी की और प्रधानमंत्री कुसुम योजना-ए के तहत आवेदन किए। लेकिन इनके आवेदन एक साल से धूल खा रहे हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें सोलर प्लांट लगवाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। जबकि उक्त योजना के तहत किसानों को 500 किलोवॉट से लेकर 2 मेगावॉट क्षमता के सोलर प्लांट लगवाने की स्वीकृति दी जानी थी। उक्त योजना का लक्ष्य है कि किसान अपने उपयोग की बिजली सोलर प्लांटों के जरिए खुद बनाएं और उपयोग के बाद भी यदि बिजली बचती है तो उसे बेचकर लाभ कमाए। यही नहीं, केंद्र सरकार सोलर प्लांट के जरिए बिजली पैदा कर कोयला आधारित बिजली के खतरों को कम करने और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा भी देना चाहती है। वहीं किसानों के आरोप है कि अर्जा विकास निगम के अधिकारी उन्हें अनदेखा कर रहे हैं। जबकि कई बिल्डरों व उद्योगपतियों को लाभ दिए हैं। मप्र के एक बड़े समूह को 1500 मेगावॉट का प्रोजेक्ट दिया, लेकिन किसानों की सुनवाई नहीं हो रही है।
मंत्री का पत्र भी विभाग ने हवा किया
ये किसान फरवरी 2025 में आवेदन किए थे। संबंधितों ने नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला को शिकायत की। इस आधार पर उन्होंने ऊर्जा विकास निगम के एमडी को पत्र भी लिखा। तब भी किसानों को तवज्जों नहीं दी जा रही है। किसानों का कहना है कि सोलर प्लांट न लग पाने के कारण उनकी जमीन बंजर पड़ी है। ऐसा इसलिए क्योंकि सोलर प्लांट की अनुमति मिलने के इंतजार में उन्होंने लगातार चार फसलें नहीं लीं, जिसके कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
आवेदनों पर एक साल में भी सुनवाई नहीं
किसानों का आरोप है कि शासन के नियमों के अनुरूप उन्होंने ऑनलाइन आवेदन किए। फीस जमा की और जमीन को प्लांट लगाने के लिए तैयार भी कराया। इसमें कई रुपए खर्च किए गए। लेकिन ऊर्जा विकास निगम में एक साल से आवेदन पड़े हुए हैं। इन पर कोई विचार ही नहीं किया जा रहा है। किसानों को दपत्तरों के चक्कर लगवाए जा रहे। केंद्र सरकार की यह योजना किसानों की ऊर्जा की कमी की समस्या दूर कर सकती थी, लेकिन विभाग इसका लाभदिलाने दिलचस्पी नहीं ले रहा।
किसानों का दर्द
11 हजार 800 रुपए शुल्क जमा वार आवेदन किया। एक वर्ष से अधिक हो चुके हैं। ऊर्जा विकास निगम में 50 से ज्यादा चक्कर लगा चुका है. अधिकारी मना भी नहीं करते और अनुमति भी नहीं उक जमीन में प्लांट लगाने के लिए 10 लाख रुपए वर्ष हो चुके हैं। कोई सुनवाई नहीं हो रही, जबकि बिल्लारों व उद्योगपतियों के काम्र पहले हो रहे हैं।
अजय कसाना, किसान (डबरा)
आवेदन किए एक साल से अधिक का समय हो चुका है. ऊर्जा विकास निगम के अधिकारी हर बार टरका देते हैं। जबकि हमारे क्षेत्र में बिजली की कमी है. यदि सोलर पनांट लग जाए तो स्वयं के साथ आसपास के किसानों को भी फायदा होगा।
राजेंद्र चतुर्वेदी, किसान (यतिया)
कम से कम शुल्क ही वापस दे दें, लेकिन ऊर्जा विकास निगम के अधिकारी यह भी नहीं कर रहे हैं। कई बार संपर्क कर चुके हैं, सरकार कहती है कि किसानों को कोई दिक्कत नहीं आने देंगे, लेकिन हकीकत में किसानों को परेशान किया जा रहा है।
विव्यांशी सिंह, किसान (चिनौर) ग्वालियर

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