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भोपाल अंतर्राष्ट्रीय वन मेले में छाई 5 फीट लंबी लौकी, डेढ़ किलो का नींबू

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भोपाल: 5 फीट लंबी 7 किलो वजन वाली लौकी, डेढ़ किलो का नींबू और करीब एक इंच का छोटा सा संतरा. सुनने और देखने में यह अजूबा जरूर लगे, लेकिन यह मध्य प्रदेश की जैव विविधता है, जो प्रदेश के अलग-अलग अंचलों के वनांचल में पैदा हो रही है. जैव विविधता बोर्ड की मदद से अनूपपुर में देसी प्रजातियों की फसल, फल-फूल, सब्जियों का बीजबैंक तैयार किया है, जिसमें स्थानीय देसी प्रजातियों के 200 बीजों को इकट्ठा किया गया है.

इंसान के बराबर लौकी

भोपाल में वन विभाग द्वारा वन मेले का आयोजन किया गया है. 23 दिसंबर तक चलने वाले मेले में आयुर्वेदिक दवाओं, जड़ी-बूटियों, वनोपज सहित वनों और आदिवासियों से जुड़े सामानों के अलग-अलग 350 स्टॉल लगाए गए हैं. वन मेले के अंदर जैसे ही दाखिल होते हैं, इसके बीचों बीच जैव विविधता बोर्ड का स्टॉल मौजूद है. यहां रखी 5 फीट लंबी लौकी सबका ध्यान खींचती है. करीब इंसान की लंबाई वाली लौकी के अलावा यहां करीब 7 किलो वजनी लौकी भी है.

अनूपपुर से आए प्रगतिशील किसान सेवक राम मरावी बताते हैं कि “यह हाईब्रिड नहीं, बल्कि 100 फीसदी देसी लौकी है. अभी इसकी लंबाई कम है, यह करीब साढ़े 7 फीट तक लंबी हो जाती है. इसी तरह सफेद लौकी का वजन भी 7 किलो तक होता है.”

पपीता के बराबर नीबू

डेढ़ किलो वजनी नींबू

यहां डेढ़ किलो वजनी नींबू भी लाया गया है. इसका आकार पपीते जैसा है. वन मेला घूमने पहुंचे आशीष ने जब इसे उठाया तो उन्होंने इसे पपीता ही समझा, लेकिन जब उन्हें बताया गया कि यह पपीता नहीं, बल्कि नींबू है तो वह भी आश्चर्य में पड़ गए. रीवा स्थित गोविंदगढ़ के किसान नेपाल सिंह ने बताया, “यह बिजौरा प्रजाति का नीबू है और सामान्य तौर पर इसका वजन डेढ़ से 5 किलो तक होता है. इसका औषधीय उपयोग है. पथरी के मरीजों के लिए बेहद लाभकारी होता है. इसमें एसिड की मात्रा बहुत ज्यादा होती है.”

इंसान के बराबर लंबी लौकी

नेपाल सिंह बताते हैं कि “वन मेले में हमने ऐसे ही कई प्रजातियों की वनस्पतियों, फल-फूल और उनके बीज को प्रदर्शित किया है. इस प्रदर्शनी के पीछे का उद्देश्य है कि यहां आने वाले लोग प्रदेश की जैव विविधता को समझ सकें. इनमें से कई वनस्पतियां धीरे-धीरे विलुप्त हो रही हैं, जिनके बीजों और पौधों को संरक्षित किया जा रहा है.” नेपाल सिंह एक इंच छोटे संतरे को दिखाते हुए कहते हैं कि “यह अब सिर्फ जंगलों में पाया जाता है, लेकिन असल में यही असली संतरा है. यह देखने में छोटा जरूर है, लेकिन बेहद गुणकारी है.”

200 बीजों का बनाया बैंक

जैव विविधता बोर्ड से जुड़कर बीज बैंक तैयार करने वाले सेवक राम मरावी कहते हैं कि “हमारी प्रकृति ने कई पौष्टिक फसलों, फसलों को दिया है, लेकिन ज्यादा उत्पादन के लिए नई-नई वैरायटियां किसान खेतों में लगाने लगा है. इससे उत्पादन तो बढ़ा है, लेकिन इसकी न्यूट्रिशियन वेल्यु कम हुई है.” सेवक राम कहते हैं कि “कोविड के बाद सरकार ने मिलेट्स को बढ़ावा दिया है.

देसी प्रजातियों के 200 बीज दिखाए गए

लोगों में अब कोदो, कुटकी, ज्वार, सांबा, कंगनी, बाजरा जैसे कई मिलेट्स की डिमांड बढ़ी है, लेकिन हमने एक ऐसे मिलेट्स का बीज भी इकट्ठा किया है, जो मिलेट्स में भी सबसे ज्यादा पौष्टिक होता है. सिकिया मिलेट्स एक घास की प्रजाति है. यह जंगलों में पैदा होता है. इसका मदर सीड तैयार करके धीरे-धीरे इसकी खेती करना शुरू की है. इसकी खासियत यह है कि इसमें 13 परसेंट से ज्यादा फाइबर की मात्रा पाई जाती है. इसके अलावा कैल्शियम, मैग्नीशियम जैसे मिनिरल्स की मात्रा भी इसमें भरपूर होती है.

1 इंच का अनोखा संतरा

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