सब्जियों के दामों में लगने वाली है आग, ईरान जंग की चपेट में आएंगे ये देश

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मिडिल ईस्ट में जारी ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ अब दुनिया की रसोई तक पहुंचने वाला है. ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ की नाकेबंदी के कारण कच्चे तेल की कीमतें $100 के करीब पहुंच गई हैं, जिससे माल ढुलाई का खर्च दोगुना हो गया है. इंटरनेशनल मीडिया के मुताबिक, दुनिया के एक-तिहाई यूरिया खाद की सप्लाई इसी युद्ध क्षेत्र से होती है, जो फिलहाल ठप है. जिसकी वजह से 15 देशों के सामने मुश्किल वक्त आने वाला है.

तेहरान: वेस्ट एशिया में जारी जंग के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ब्लॉक हो गया और दुनिया की तेल सप्लाई ठप्प हो गई है. ऐसे में कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें रॉकेट की रफ्तार से बढ़ रही हैं. आम लोग रोते-पीटते किसी तरह गुजारा करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन बीच एक और महंगाई बम फटने की रिपोर्ट आ रही है. इंटरनेशनल मीडिया के मुताबिक अब दुनिया के कई देशों में खाने-पीने की चीजों के दाम भी आसमान छूने वाले हैं. इन रिपोर्ट्स में कुछ देशों के नाम भी गिनाए गए हैं, जहां अनाज से लेकर सब्जियां और फल तक महंगे होने वाले हैं. आगे जानें इस लिस्ट कौन-कौन है और इसमें भारत है या नहीं?

होर्मुज पर बवाल के कारण सब्जियों और अनाज की किल्लत

डाऊजोन्स और द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक अगर ईरान और इजरायल की जंग कुछ हफ्तों तक और खिंचती है तो दुनिया को एक ऐसी महंगाई और अनाज की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है, जैसा दशकों में नहीं देखा गया.

युद्ध का सबसे पहला और घातक असर लॉजिस्टिक्स पर पड़ा है. इजरायली हवाई हमलों में ईरान के तेल डिपो और रिफाइनरियों के तबाह होने से तेल की कीमतों में आग लग गई है. कच्चा तेल अब $100 प्रति बैरल के बेहद करीब है. यानी ट्रांस्पोर्ट की लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा मतलब है कि फल, सब्जी और अनाज को एक देश से दूसरे देश भेजने का खर्च दोगुना हो गया है.

खेती के लिए सबसे बड़ी चिंता

  • जानकारों का कहना है कि डीजल की बढ़ती कीमतें ब्राजील और अमेरिका जैसे बड़े अनाज निर्यातकों के लिए सिरदर्द बन गई हैं, जिसका खामियाजा पूरी दुनिया को ऊंचे दामों के रूप में भुगतना होगा.
  • दुनिया की खेती के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय फर्टिलाइजर है. खेती के लिए यूरिया दुनिया के कुल निर्यात का एक-तिहाई हिस्सा और अमोनिया का एक-चौथाई हिस्सा इसी युद्ध क्षेत्र से होकर गुजरता है.
  • ईरान, सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे बड़े खाद निर्यातक पूरी तरह ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर निर्भर हैं. इस रास्ते की नाकेबंदी का मतलब है कि दुनिया भर के खेतों तक खाद नहीं पहुंच पाएगी.
  • कतर की दिग्गज कंपनी ‘कतर-एनर्जी’ ने गैस सप्लाई बाधित होने के कारण यूरिया का उत्पादन रोक दिया है. इसके चलते यूरोप में गैस की कीमतें रातों-रात 40% तक बढ़ गई हैं.

कौन से हैं वो देश?

DowJones की रिपोर्ट में उन 15 देशों की सूची दी गई है जहां इस युद्ध के कारण महंगाई, राजनीतिक अस्थिरता और भुखमरी फैलने की सबसे ज्यादा आशंका है. इनमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इथियोपिया, नाइजीरिया और इराक जैसे देश शामिल हैं. इन देशों की अर्थव्यवस्था पहले से ही नाजुक है, और अब खाद की कमी और अनाज की बढ़ती कीमतें यहां की सरकारों के लिए ‘अस्तित्व का संकट’ खड़ा कर सकती हैं.

भारत कहां खड़ा है?

भारतीय किसानों के लिए राहत की बात यह है कि सरकार के पास आगामी खरीफ सीजन के लिए काफी मात्रा में यूरिया का भंडार मौजूद है. अधिकारियों का मानना है कि कम से कम एक महीने तक भारत को कोई बड़ी समस्या नहीं होगी. लेकिन, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि असली परीक्षा तब होगी जब यह युद्ध 6 महीने से ज्यादा खिंचेगा. अगर जंग लंबी चली, तो अगली फसल (रबी सीजन) के लिए खाद की किल्लत हो सकती है.
डीजल महंगा होने से भारतीय किसानों की जुताई और सिंचाई की लागत बढ़ जाएगी, जिसकी वजह से बाजार में आटा, दाल और चावल के दाम बढ़ना तय है.

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