भोपाल / देश के साथ मध्यप्रदेश के किसानों की लगातार खराब होती स्थिति पर चर्चा करने के लिए हुई संयुक्त किसान मोर्चा मध्यप्रदेश की एक बैठक ने अतिवृष्टि की तबाही के शिकार हुए किसानो के प्रति सरकार के गैरजिम्मेदार रवैये, खाद के गहराते और लगातार जारी सकट, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी करवाने में पूरी तरह असफल रहने और अब भावान्तर के नाम पर किसानों को ठगते हुए अडानी और मुट्ठीभर बड़ी खरीद कंपनियों की कमाई की व्यवस्था करने, बिजली न आने के बावजूद भारी बिल थमाए जाने और स्मार्ट मीटर थोपने, लैंड पूलिंग और मनमाने तरीके से कृषिभूमि के अधिग्रहण और किसानो आदिवासियों की बेदखली करने जैसे हालात पर चर्चा की।
संयुक्त किसान मोर्चे ने कहा है कि इन सबके चलते मध्यप्रदेश में किसानों की आत्महत्याएं बढती जा रही हैं । हाल ही में कुछ सोयाबीन किसान आत्महत्या के लिए मजबूर हुए हैं । इस सबके बाद भी सरकार की ओर से कोई कदम तक नहीं उठाये जा रहे हैं । यह स्थिति तब है जबकि देश के कृषिमंत्री इसी प्रदेश के हैं । किसान आबादी के प्रति अवज्ञा और सत्ता के अहंकार की स्थिति तो यह है कि वर्तमान मुख्यमंत्री ने अपने अब तक के कार्यकाल में एक बार भी किसान प्रतिनिधियों से मुलाक़ात का समय नहीं निकाला है ।
संयुक्त किसान मोर्चे ने इस बारे एक ज्ञापन मुख्यमंत्री को भेजनेऔर उनसे अविलम्ब किसानों से चर्चा करने तथा निम्नलिखित मुद्दों पर समाधान निकालने का आग्रह किया जाएगा । यदि कोई समाधान नहीं निकला तो मोर्चे नेआन्दोलन के दो चरण निर्धारित किये हैं ।
इसमें 15 अक्टूबर को प्रदेश भर में कलेक्टरी, तहसीलों पर प्रदर्शन कर ज्ञापन दिए जायेंगे । मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश के नाम से संबोधित इन ज्ञापनों में 10 दिन में सकारात्मक कार्यवाही न होने पर राजधानी में प्रदर्शन की चेतावनी दी जाएगी । यदि समाधान न निकला तो 27 अक्टूबर को राजधानी भोपाल में किसानों का बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा ।
संयुक्त किसान मोर्चे ने जो 10 मांगें उठाई हैं उनमें 1- भावान्तर नहीं भाव चाहिए ; वर्तमान में घोषित भावान्तर योजना किसानों की नहीं कुछ बड़ी कंपनियों के फायदे के लिए है । इसे तुरंत वापस लिया जाए और सख्ती के साथ सोयाबीन सहित सभी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य से खरीद सुनिश्चित की जाए । इससे कम पर खरीदने को दंडनीय अपराध मानकर कार्यवाही की जाए ।
2 – दो साल पहले चुनाव घोषणापत्र में धान की कीमत 3100 रुपये प्रति क्विंटल देने का वायदा किया गया था । उसके अनुपात इस वर्ष धान की खरीदी का मूल्य 3300 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया जाए ।
3 – अतिवृष्टि से हुए नुकसान का नजरिया या सॅटॅलाइट सर्वे करने की बजाय पटवारी हलके को इकाई मानकर औसत उपज की तुलना में आई कमी को आधार बनाकर क्षति का पूरा मुआवजा दिया जाए । इसी तरह बीमा कंपनियों द्वारा की जा रही धांधली और धोखाधड़ी रोककर नुक्सान की पूरी भरपाई की जाए ।
4 – खाद का संकट सरकार की अक्षमता और असफलता के कारण है । जरूरत पड़ने के पहले ही खाद का पर्याप्त भण्डारण किया जाए और हरेक किसान को उसकी आवश्यकता के अनुरूप खाद उपलब्ध कराया जाए ।
5 – मध्यप्रदेश नकली खाद और बीज का अड्डा बना हुआ है । इनके सौदागरों और कृत्रिम संकट पैदाकर उनकी मदद करने वाले अधिकारियों को जेल भेजकर समुचित दंड दिया जाए ।
6 – प्रदेश में लैंड पूलिंग की धोखाधड़ी और अलग अलग परियोजनाओं, कथित एक्सप्रेस वे, अभयारण्यों आदि इत्यादि के नाम पर जबरिया अधिग्रहण और बेदखली रोकी जाए । किसान की मर्जी और ग्राम सभा की वास्तविक मंजूरी और 2013 भूमि अधिग्रहण क़ानून के आधार पर मुआवजे और पुनर्वास के बिना जमीन अधिग्रहण नहीं किया जाए ।
7 – किसानो को कमसेकम 12 घंटे बिजली दी जाए । बिजली दिन के समय दी जाए । बढ़ाचढ़ा कर भेजे गए बिजली बिल निरस्त किये जाएँ । स्मार्ट मीटर की योजना रद्द की जाए ।
8 – आत्महत्या करने वाले किसानों के परिजनों को पर्याप्त मुआवजा देते हुए उनके एक आश्रित को सरकारी नौकरी दी जाए ।
9 – टैरिफ से पड़ने वाले असर से किसानों को बचाने के लिए अंतर की राशि का भुगतान सरकार करे । जो मुक्त व्यापार समझौते किये जा रहे हैं उनके दायरे के कृषि को बाहर रखा जाए । इन दोनों के चलते कपास उत्पादक किसानों को हुए घाटे की पूर्ति की जाये ।
10 – रबी की फसल के लिए हाल ही में घोषित की गयी न्यूनतम समर्थन मूल्य की दरें अनुचित और अपर्याप्त हैं। स्वामीनाथन आयोग की दरों की तुलना में इन दरों से देश के किसानो को 3 लाख करोड़ रुपयों से अधिक का नकद नुक्सान होने वाला है। इन दरों को वापस लेकर नई दरों का निर्धारण किसान संगठनो के साथ मिलकर किया जाये ।
बी के यू (टिकैत) के अनिल यादव की अध्यक्षता में हुई संयुक्त किसान मोर्च के की इस बैठक में अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त सचिव बादल सरोज, मप्र किसान सभा (शाकिर सदन) के प्रहलाद वैरागी, किसान जाग्रति संगठन के इरफान जाफरी, बी के यू (महाशक्ति) के प्रदेश अध्यक्ष राम जगदीश दांगी सहित अनेक किसान नेता उपस्थित थे ।
कई कारणों से इस बैठक में न पहुँच सके आराधना भार्गव (किसान संघर्ष समिति), अखिलेश यादव (मप्र किसान सभा बी टी आर भवन) मनीष श्रीवास्तव (आल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन), भगवान भाई (नर्मदा बचाओ आन्दोलन), बाबूसिंह राजपूत (क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन) , विजय कुमार (आल इंडिया किसान क्रांतिकारी सभा), बबलू जाधव (भारतीय किसान एवं मजदूर सेना) संदीप सिंह ठाकुर (भारतीय श्रमिक जनशक्ति यूनियन), बुद्धसेन सिंह गोंड (मप्र आदिवासी एकता महासभा), , राजकुमार सिन्हा (एन ए पी एम एवं बरगी बाँध विस्थापित एवं प्रभावित संघ, चुटका परमाणु विरोधी संघर्ष समिति) ने भी इन निर्णयों का समर्थन किया है ।
