औरंगाबाद जिले के एक किसान कंचन गुप्ता 2 बीघा जमीन में महोगनी और सागवान के पेड़ लगाकर लाखों रुपये कमा रहे हैं. महोगनी का पेड़ हजारों रुपये किलो के भाव बिकता है.इसकी बाजार में भारी मांग है.आने वाले 10 से 12 वर्षों में तैयार होकर उन्हें बड़ा मुनाफा देंगे
भारत में सिर्फ फलदार पेड़ ही नहीं लगाए जाते हैं, बल्कि फर्नीचर के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षों की खेती भी की जाती है. इन्हीं वृक्षों में से हैं सागवान, सफेदा और महोगनी. बात अगर सागवान की करें तो इसका पेड़ बहुत ही कम समय में फर्नीचर के लिए तैयार हो जाता है. इसकी लकड़ी मजबूत होती है, इसलिए मार्केट में इसका अच्छा रेट भी मिल जाता है.
जानकारों के अनुसार, पौधे लगाने के बाद 10 से 12 साल में इसका पेड़ तैयार हो जाता है. अब आप इसे मार्केट में बेचकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. खास बात यह है कि एक एकड़ में सागवान के 400 पौधे लगाए जा सकते हैं. इसकी खेती में तकरीबन 45 से 50 हजार रुपये तक की लागत आती है. वहीं, 12 साल के बाद इसकी एक पेड़ की कीमत 40 हजार रुपये तक पहुंच जाती है. ऐसे में यदि आप 12 साल के बाद 400 पेड़ बेचेंगे तो आपकी कुल कमाई एक करोड़ 60 लाख रुपये होगी.
जून-जुलाई में खेती, सालों तक डिमांड, किसानों के लिए जैकपॉट
बिहार समेत देश के विभिन्न हिस्सों में अब पारंपरिक खेती से हटकर किसानों का रुझान व्यावसायिक खेती की ओर बढ़ रहा है. ऐसे में यदि आप भी खेती से भविष्य में आमदनी की योजना बना रहे हैं, तो महोगनी, अर्जुन और सागवान जैसे बहुमूल्य पौधों की खेती एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है. डॉ.राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र बिरौली के कृषि वैज्ञानिक डॉ.आर.के. तिवारी के अनुसार, इन पेड़ों की लकड़ियां अत्यंत कीमती होती हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी जबरदस्त मांग है. महोगनी, अर्जुन और सागवान की लकड़ी से जहाज, फर्नीचर, प्लाईवुड, क्रिकेट बैट, बंदूक की बट जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं, जिनकी बाजार में हमेशा मांग बनी रहती है. इससे किसानों को नियमित और अच्छी आमदनी होने की संभावना बनी रहती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इन पौधों को खेतों में सघन पंक्तियों में या खेतों की मेड़ों पर लगाकर कम लागत में अधिक लाभ कमाया जा सकता है.
वर्षा ऋतु में करें खेती
इन बहुपयोगी पौधों की खेती के लिए वर्षा ऋतु यानी जून-जुलाई का समय सबसे उपयुक्त माना गया है. इस दौरान मॉनसून सक्रिय रहता है और पौधे आसानी से जम जाते हैं. पौध रोपण की प्रक्रिया में सबसे पहले खेत की गहरी जुताई कर उसे कुछ दिनों के लिए छोड़ देना चाहिए, जिससे मिट्टी का ढांचा बेहतर हो सके. फिर दोबारा जुताई करके पाटा चलवाएं और खेत को समतल बनाएं. इसके बाद 2×2 मीटर की दूरी पर दो फीट गहरे गड्ढे खोदें. इन गड्ढों में जैविक और रासायनिक खाद की निर्धारित मात्रा मिट्टी में मिलाकर भरना चाहिए. यदि रोपण के समय बारिश न हो रही हो, तो गड्ढे को भरने के बाद सिंचाई अवश्य करें और उसे ढक दें ताकि नमी बरकरार रहे. इस तरह की प्रारंभिक तैयारी से पौधे जल्दी विकसित होते हैं और जड़ पकड़ लेते हैं.
एक पेड़ से 15 हजार तक की कमाई
इन पेड़ों की कटाई आम तौर पर 12 से 15 वर्षों बाद की जाती है, जब यह पूरी तरह परिपक्व हो जाते हैं. हालांकि यदि किसान कुछ वर्ष और प्रतीक्षा करते हैं, तो लकड़ी की गुणवत्ता और बाजार मूल्य में और भी वृद्धि होती है. लंबे समय के निवेश के रूप में इन पौधों की खेती किसानों के लिए बेहद फायदेमंद हो सकती है. इसमें एक बार की गई मेहनत और योजना के बदले वर्षों तक लाभ मिलता है. कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में कृषि का यह स्वरूप किसानों की आय बढ़ाने में एक मजबूत कड़ी बनेगा. खास बात यह है कि यह खेती पारंपरिक फसलों की तुलना में मौसम की अनिश्चितताओं से भी काफी हद तक सुरक्षित रहती है.
