रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई देश भर में लगभग पूरी हो चुकी है. काफी किसानों से प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा कवर लेने के लिए उसका बीमा करवा लिया है, लेकिन अभी भी करोड़ों किसान ऐसे हैं जो बीमा का लाभ नहीं लेते. जबकि, मामूली रकम देकर आप बड़े रिस्क से बच सकते हैं. फसल बीमा प्रीमियम तीन हिस्सों में जमा होता है. पहला और दूसरा हिस्सा केंद्र और राज्य सरकार जमा करते हैं, जबकि तीसरे हिस्से को किसान अदा करता है, जो अलग-अलग फसलों के लिए 1.5 से 5 फीसदी तक होता है. यानी किसान को मामूली रकम ही देनी पड़ती है. ऐसे में बीमा करवाना किसी भी किसान के लिए फायदे का सौदा होता है. इसके लिए कितना पैसा लगता है इसे आज हम समझा देते हैं.
देश के सबसे बड़े गेहूं उत्पादक सूबे उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले का कोई किसान अगर गेहूं की फसल का बीमा करवाना चाहता है तो एक हेक्टेयर के लिए सिर्फ 1233 रुपये देने होंगे और उस पर 82,200 रुपये का कवर मिलेगा. यानी अगर फसल किसी प्राकृतिक आपदा में बर्बाद होती है तो इतनी रकम बीमा करवाने वाले किसान को मुआवजे के तौर पर मिल सकती है. यानी आधे क्विंटल गेहूं के दाम में आप अपनी एक हेक्टेयर में लगी फसल को रिस्क से बचा सकते हैं.
बदल जाती है प्रीमियम और कवरेज की राशि
फसल भले ही एक हो, लेकिन बीमा प्रीमियम और क्लेम कवरेज की रकम अलग-अलग जिलों में बदल जाती है. जैसे हरियाणा के फरीदाबाद का कोई किसान अगर एक हेक्टेयर में गेहूं की फसल का बीमा करवा रहा है तो उसे 1148.12 रुपये देने होंगे और फसल खराब होने पर उसे 76,541 रुपये तक का क्लेम मिलेगा. कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि बहुत कम रकम में आप गेहूं की फसल का बीमा करवाकर उसे रिस्क से बचा सकते हैं. किसान आसानी से अपने मोबाइल पर ही पीएम फसल बीमा योजना के पोर्टल पर जाकर चंद सेकंड में प्रीमियम और कवरेज की गणना कर सकते हैं.
बुआई से लेकर फसल कटाई के बाद तक कवरेज
हालांकि, अभी रबी सीजन में फसल बीमा की तारीख निकल चुकी है, लेकिन किसान आगामी फसल सीजन में अपनी फसल का बीमा करवाकर बड़ा कवरेज हासिल कर सकते हैं, जिसके लिए छोटी-सी कीमत चुकानी होगी. हाल ही में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहन ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लेकर कई अहम जानकारियों और उसमें किए गए बदलाव की जानकारी दी थी कि कैसे यह योजना किसानों को फायदा पहुंचा रही है.
कृषि मंत्री ने कहा कि PMFBY विश्व की सबसे बड़ी फसल बीमा योजना है, जबिक प्रीमियम के लिहाज से यह तीसरी सबसे बड़ी योजना है. यह योजना प्राकृतिक आपदाओं समेत विभिन्न पड़ावों में फसल सुरक्षा का कवरेज प्रदान करती है. इसमें बीज की बुवाई से लेकर फसल कटाई के कुछ समय बाद तक भी कवरेज मिलता है. वहीं, अगर बीमा कंपनी समय पर मुआवजा नहीं देती है तो उसे ब्याज सहित किसानों को मुआवजे का भुगतान करना होगा.
दो साल और बढ़ाई गई फसल बीमा योजना
कैबिनेट ने 1 जनवरी को हुई बैठक में फैसला लेते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और मौसम आधारित फसल बीमा योजना को 2025-26 तक जारी रखने को मंजूरी दी है. इसका कुल बजट 69,515.71 करोड़ रुपये है. बीमा योजना में तकनीकी सुधार के लिए 824.77 करोड़ रुपये आवंटित करने के साथ नवाचार और प्रौद्योगिकी कोष (FIAT) की स्थापना को मंजूरी दी गई है.