एक ओर कृषि मंत्रालय किसानों को उनकी फसलों का उचित दाम दिलाने की पैरोकारी कर रहा है तो दूसरी ओर खाद्य आपूर्ति मंत्रालय ने किसानों को झटका देने का काम कर दिया है. हम बात कर रहे हैं ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) की, जिसके जरिए गेहूं का दाम गिराने की कोशिश हो रही है. इसके जरिए सरकार बाजार में सस्ते दर गेहूं बेचेगी. जिससे गेहूं की मौजूदा ऊंची कीमतें कम हो जाएंगी. ऐसा होने पर किसानों को नुकसान होगा. दिल्ली स्थित कृषि भवन में ही खाद्य आपूर्ति मंत्रालय भी मौजूद है और उसी में कृषि मंत्रालय भी. एक किसानों की पैरोकारी कर रहा है और दूसरा कंज्यूमर्स की. कंज्यूमर के लिए किसान को आर्थिक नुकसान करने वाला काम किया जा रहा है. वो भी तब जब देश के कई हिस्सों में मंडियों में नया गेहूं आने लगा है. जब किसानों को दो पैसे कमाने का वक्त आया है तो उसी वक्त उसका दाम गिराने का जतन किया जा रहा है.
किसानों की आय बढ़ाने की बात करने वाले कृषि मंत्रालय से बार-बार यह सवाल पूछा जाएगा कि जब गेहूं किसानों को अधिक दाम मिलने की बारी आई है तो सरकारी अमला दाम गिराने में क्यों लगा हुआ है. दरअसल, सरकार को चिंता सिर्फ कंज्यूमर्स की ही नहीं है बल्कि उससे आगे अपने बफर स्टॉक के लिए गेहूं खरीदने की भी है. एक अप्रैल से अधिकांश राज्यों में गेहूं की सरकारी खरीद शुरू हो जाएगी. उससे पहले सरकार गेहूं का दाम किसी भी तरह से एमएसपी के स्तर तक लाना चाहती है. क्योंकि ऐसा नहीं हुआ तो उसे बफर स्टॉक के लिए एमएसपी पर गेहूं बेचेगा कौन? गेहूं का नया एमएसपी 2425 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि बाजार में 3000 रुपये प्रति क्विंटल तक का भाव चल रहा है.
राष्ट्रीय स्तर पर गेहूं की बुवाई और उत्पादन अनुमान
इस बार रबी सीजन में किसानों ने गेहूं की बंपर बुवाई की है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार 20 जनवरी तक इस वर्ष लगभग 320 लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती की गई, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान 315.63 लाख हेक्टेयर की तुलना में 5 लाख हेक्टेयर अधिक है. अनुकूल मौसम और मिट्टी में पर्याप्त नमी के चलते फसल भी अच्छी दिख रही है और अनुमान है कि इस बार उत्पादन भी बढ़ेगा.
केंद्र ने मौजूदा वर्ष में गेहूं उत्पादन टारगेट 1150 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया है. यह फसल वर्ष 2023-24 जुलाई-जून के दौरान रिकॉर्ड 1132 लाख मीट्रिक टन से अधिक है. जबकि, कृषि मंत्रालय अगले महीने उत्पादन के सटीक अनुमान जारी कर सकता है. केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी पहले ही पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, गुजरात और राजस्थान के खाद्य मंत्रियों के साथ इन राज्यों में गेहूं की खरीद बढ़ाने पर चर्चा कर चुके हैं.
एमएसपी से 600 रुपये अधिक चल रहा गेहूं का भाव
बफर स्टॉक के लिए 2025-26 मार्केटिंग सीजन के लिए गेहूं की खरीद यूपी समेत कई राज्यों में 1 मार्च से शुरू हो रही है. जबकि, देशभर में 1 अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद हर हाल में शुरू हो जाएगी. मार्च से खरीद की शुरुआत को देखें तो अब कुछ सप्ताह का समय ही बचा है और वर्तमान में बाजार में गेहूं की कीमत एमएसपी दाम से 500-600 रुपये प्रति क्विंटल अधिक चल रही है. किसान से गेहूं खरीद के लिए एमएसपी 150 रुपये बढ़ाकर 2425 रुपये तय किया गया है. हालांकि, बाजार में गेहूं का थोक मूल्य 10 फरवरी को 2967 रुपये क्विंटल पर दर्ज किया गया है. इस हिसाब से बाजार में मौजूदा गेहूं का भाव एमएसपी की तुलना में 540 रुपये प्रति क्विंटल अधिक चल रहा है.
खरीद से पहले 12 लाख टन गेहूं बाजार में उतारा जा रहा
गेहूं के सरकारी खरीद मूल्य यानी एमएसपी की तुलना में बाजार मूल्य अधिक होने से किसानों में उम्मीद जगी है कि गेहूं के लिए उन्हें इस बार अच्छी कीमत मिलेगी. लेकिन उनकी इस उम्मीद पर पानी फिरता दिख रहा है. क्योंकि केंद्र ने एफसीआई को OMSS के तहत ट्रेडर्स, मिलर्स को गेहूं बिक्री लिमिट 1.4 लाख टन से बढ़ाकर 4.5 लाख टन कर दिया है. इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि केंद्र ने दिसंबर में एफसीआई के जरिए 25 लाख टन गेहूं बाजार में लाने के निर्देश दिए थे, जिसमें से करीब 13 लाख मीट्रिक टन गेहूं बाजार में उतारा जा चुका है और अब 12 लाख मीट्रिक टन गेहूं अगले 2 सप्ताह में बाजार में उतारने की तैयारी की जा रही है.
..तो किसानों को नहीं मिल सकेगा गेहूं का अधिक दाम
एफसीआई के जरिए बाजार में 12 लाख टन गेहूं की आपूर्ति होने पर गेहूं का भाव ऐन सरकारी खरीद से पहले नीचे पहुंच जाएगा. एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि एफसीआई के आपूर्ति बढ़ाने से गेहूं का बाजार मूल्य 1 मार्च से पहले एमएसपी से भी नीचे पहुंच जाएगा. अगर ऐसा होता है तो किसानों को गेहूं का अधिक दाम नहीं मिल पाएगा और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की किसानों को उपज का अधिकतम मूल्य दिलाने के प्रयासों को चोट पहुंचेगी. एक्सपर्ट का कहना है कि सरकार को गेहूं का सरप्लस भाव किसानों को देने की व्यवस्था करनी चाहिए, वह बोनस के रूप में भी इसे देकर उनका भला कर सकती है. लेकिन, खाद्य मंत्रालय के हालिया फैसलों और प्रयासों को देखा जाए तो कीमतें नीचे लाने पर जोर है, जो किसानों को अधिक कीमत दिलाने की मंशा पर सवाल खड़े करते हैं.