*मध्य प्रदेश में खाद संकट नहीं’, कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना बोले खाद की लाइनों और वायरल वीडियो को प्री-प्लान रणनीति*

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मध्य प्रदेश में खाद संकट पर कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना का बयान विवादों में है. उन्होंने खाद की लाइनों और वायरल वीडियो को प्री-प्लान रणनीति बताया. मंत्री ने दावा किया कि इस साल खाद की उपलब्धता ज्यादा है. सरकार जनवरी 2026 से ऑनलाइन खाद वितरण और होम डिलीवरी शुरू करने जा रही है.

भोपाल. मध्य प्रदेश में खाद की किल्लत को लेकर किसानों की परेशानी लगातार बढ़ रही है. इसी बीच कृषि विभाग की दो साल की उपलब्धियां गिनाने के दौरान कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना खाद संकट से जुड़े सवालों में उलझते नजर आए. खाद के लिए लगने वाली लंबी लाइनों और वायरल हो रहे वीडियो पर मंत्री ने अप्रत्याशित बयान देते हुए कहा कि यह सब प्री-प्लान रणनीति का हिस्सा है. मंत्री के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है.

कृषि मंत्री का कहना था कि खाद की कमी को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा रहा है, जबकि सरकारी आंकड़े कुछ और ही कहानी बताते हैं. उन्होंने दावा किया कि पिछले साल की तुलना में इस साल प्रदेश को ज्यादा खाद उपलब्ध कराई गई है. इसके साथ ही सरकार ने खाद वितरण व्यवस्था को पूरी तरह बदलने का रोडमैप भी पेश किया है. जनवरी 2026 से ऑनलाइन खाद वितरण और होम डिलीवरी की योजना लागू करने की घोषणा की गई है.

खाद की लाइनों पर मंत्री का विवादित बयान
कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना ने खाद वितरण को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा कि लाइनों के फोटो और वीडियो अचानक नहीं आते. उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कि ये वीडियो कैसे और कहां से आते हैं. मंत्री के मुताबिक, चार लोगों को भीड़ में घुसाकर वीडियो बनाए जाते हैं और फिर सोशल मीडिया पर हंगामा खड़ा किया जाता है. मंत्री ने यह भी कहा कि थप्पड़ दिखाकर माहौल बनाया जाता है, जबकि असल स्थिति उतनी गंभीर नहीं है.

आंकड़ों में क्या कहती है खाद की स्थिति
कृषि मंत्री ने कहा कि सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार इस साल खाद की उपलब्धता पिछले साल से बेहतर है. उनका दावा है कि वितरण में किसी तरह की कमी नहीं है, बल्कि प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियां सामने आ रही हैं. मंत्री ने भरोसा दिलाया कि खाद के लिए लगने वाली लाइनें जल्द खत्म हो जाएंगी. कृषि मंत्री ने भावांतर भुगतान योजना पर जानकारी देते हुए कहा कि इस योजना के तहत 9.36 लाख किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है. अब तक 5.98 लाख किसानों ने 13.89 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन मंडियों में बेचा है. पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन मॉनिटर की जा रही है.

जनवरी 2026 से बदलेगी खाद वितरण की व्यवस्था
कृषि मंत्री ने घोषणा की कि जनवरी 2026 से प्रदेश में खाद वितरण पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया जाएगा. किसान रजिस्ट्रेशन कराएंगे और खाद उनके घर तक पहुंचेगी. मंत्री के मुताबिक, इससे लाइनें खत्म होंगी और बिचौलियों की भूमिका भी कम होगी.
जब मंत्री उलझे, आयुक्त ने संभाला मोर्चा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब कृषि मंत्री सवालों में उलझते दिखे, तब कृषि विभाग के आयुक्त निशांत वरवड़े ने स्थिति संभाली. उन्होंने बताया कि प्रदेश में खाद वितरण का करीब 70 फीसदी काम एफओआर प्रणाली के तहत किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि देश में सिर्फ मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ ही ऐसे राज्य हैं, जहां यह व्यवस्था लागू है. आयुक्त निशांत वरवड़े ने बताया कि मध्य प्रदेश की भावांतर योजना का नीति आयोग अध्ययन कर रहा है. प्रदेश के मुख्य सचिव 26 दिसंबर को दिल्ली में इस योजना पर प्रेजेंटेशन देंगे. इसके बाद योजना में जरूरी बदलाव किए जाएंगे.
ई-विकास पोर्टल से होगी खाद की होम डिलीवरी
आयुक्त निशांत वरवड़े ने बताया कि सरकार ई-विकास वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान सिस्टम पर काम कर रही है. यह सिस्टम खाद की होम डिलीवरी के लिए तैयार किया जा रहा है. इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर विदिशा, शाजापुर और जबलपुर में शुरू किया गया है.