भारतीय बीन की नई क़िस्मों से आदिवासी किसानों की आजीविका में हो रहा सुधार

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भारतीय बीन की नई क़िस्में , जिसे हायसिंथ बीन, लब्लब बीन, देसी बीन, या तोंगा बीन जैसे नामों से जाना जाता है, एक अद्वितीय कृषि उपज है। यह सिर्फ़ एक साधारण सब्जी नहीं है, बल्कि एक पोषण का खजाना भी है। यह भारतीय बीन की नई क़िस्में एशिया, अफ्रीका और अमेरिका के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगाई जाती हैं और इसे सब्जी, दाल, चारा, हरा खाद, और औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है। इसके खाने योग्य बीज और फलियां पोषण से भरपूर होती हैं और स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक फ़ायदेमंद हैं।

भारतीय बीन की नई क़िस्में स्वास्थ्य के लिए है फ़ायदेमंद

भारतीय बीन की नई क़िस्में में प्रोटीन, एमिनो एसिड, विटामिन और खनिज तत्वों का अद्भुत मिश्रण होता है। ये फली शरीर के लिए बेहद लाभकारी होती है, क्योंकि इनमें विटामिन सी, विटामिन ए और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये भारतीय बीन की नई क़िस्में शरीर को ऊर्जा प्रदान करने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती हैं। इसके अलावा, इनकी पत्तियां 21-38% क्रूड प्रोटीन से भरपूर होती हैं, जो मिल्क प्रोड्यूसिंग जानवरों के लिए बेहतरीन चारा है।

भारतीय बीन की क़िस्म थार किरण

Thar Kiran और Thar Ganga, गुजरात के गोधरा में केंद्रीय बागवानी प्रयोग केंद्र में डॉ. गंगाधर  और उनकी टीम द्वारा विकसित एक विशेष भारतीय बीन की क़िस्म है, जो अपनी बैंगनी रंग की फलियों के लिए प्रसिद्ध है। इसकी विशेषताएं हैं:

  • आकर्षक बैंगनी रंग की फलियां
  • उच्च उपज क्षमता
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता
  • 100-110 दिनों में तैयार फ़सल

Thar Kiran की फलियां पोषण और स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक लाभकारी हैं। इसमें उच्च एंथोसायनिन (प्राकृतिक एंटीऑक्सिडेंट) सामग्री होती है, जो इसे और भी विशेष बनाती है। यह क़िस्म भारतीय बीन की अन्य क़िस्मों से अलग है और आदिवासी किसानों के लिए आदर्श साबित हो रही है।

भारतीय बीन की क़िस्म थार गंगा

Thar Ganga एक और शानदार भारतीय बीन क़िस्म है, जिसे सूखा प्रतिरोधक और पोषण सुरक्षा के लिए विकसित किया गया है। इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं:

  • लंबी हरी फलियां (16-17.5 सेमी)
  • उच्च उपज क्षमता (8-10 किलो प्रति पौधा)
  • 98-100 दिनों में तैयार फ़सल

Thar Ganga क़िस्म में प्रोटीन, विटामिन सी और β-कारोटीन जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो इसे आदिवासी किसानों के लिए एक आदर्श फ़सल बनाते हैं। यह क़िस्म भी रोग प्रतिरोधक क्षमता से संपन्न है और सूखा प्रतिरोधक होने के कारण आदिवासी किसानों के लिए एक उपयुक्त विकल्प है।

आदिवासी किसानों के लिए आशा की किरण

गुजरात के पंचमहल, महीसागर, छोटा उदेपुर और डांग जैसे ज़िलों के आदिवासी किसान इन भारतीय बीन क़िस्मों से विशेष लाभ उठा रहे हैं। ये भारतीय बीन क़िस्में कम लागत में उगाई जा सकती हैं, और ये सूखा प्रतिरोधक भी हैं। इनसे आदिवासी किसानों को न केवल पोषण सुरक्षा मिल रही है, बल्कि उनकी आय भी बढ़ रही है। इन फ़सलों को उगाने से किसानों की जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।

आदिवासी किसान की सफलता की कहानी

विष्णुभाई, जो गुजरात के एक आदिवासी किसान हैं, उन्होंने अपने दो एकड़ भूमि पर Thar Kiran और Thar Ganga की खेती की। उन्होंने प्रति हेक्टेयर 35 टन फलियां उत्पादित कीं और 2.80 लाख रुपये की आय अर्जित की। उनकी सफलता यह सिद्ध करती है कि भारतीय बीन की नई क़िस्में जैसे Thar Kiran और Thar Ganga आदिवासी किसानों के लिए आय में वृद्धि और पोषण सुरक्षा का बेहतरीन स्रोत हो सकती हैं।

Thar Kiran और Thar Ganga जैसी नई भारतीय बीन की नई क़िस्में न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर रही हैं, बल्कि आदिवासी किसानों के जीवन में पोषण सुरक्षा और आर्थिक मजबूती लाने का एक महत्वपूर्ण साधन बन रही हैं। ये क़िस्में आदिवासी किसानों को सूखा और कम पानी वाली परिस्थितियों में भी सफलतापूर्वक कृषि करने का अवसर दे रही हैं। इस प्रकार की कृषि पहलें आदिवासी किसानों के लिए नई उम्मीद और दिशा प्रदान करती हैं।

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