गांव में दूध से लेकर गोबर तक का पूरा बिज़नेस मॉडल हिट!…किसानों की आमदनी हुई दोगुनी 

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 डेयरी सेक्टर अब सिर्फ दूध तक सीमित नहीं रहा बल्कि गोबर से बनने वाली बायोगैस, जैविक खाद और दूध प्रोसेसिंग यूनिट ने किसानों के लिए नया बिज़नेस स्पेस खोल दिया है. कम निवेश में शुरू होने वाले इन यूनिटों की मांग बढ़ने से गांवों में माइक्रो-प्रोसेसिंग मॉडल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और किसान सरकारी योजनाओं की सहयता से स्थायी कमाई के नए रास्ते बना रहे हैं.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में डेयरी और पशुपालन हमेशा से आमदनी का भरोसेमंद आधार रहा है लेकिन अब इसका मॉडल तेजी से बदल रहा है. आज किसान केवल दूध बेचने तक सीमित नहीं रहे बल्कि वो दूध से तैयार होने वाले प्रोडक्ट्स और गोबर से बनने वाली बायोगैस व जैविक खाद को भी आय का बड़ा स्रोत बना रहे हैं. यही वजह है कि ग्रामीण भारत में डेयरी और गोबर आधारित मल्टी-सोर्स बिज़नेस मॉडल एक मजबूत विकल्प बनकर उभर रहा है जहां कम पूंजी में शुरुआत कर स्थायी और लगातार बढ़ती आमदनी हासिल की जा सकती है.

कम लागत वाला बायोगैस प्लांट अब बन रहा कमाई का नया सहारा

बायोगैस प्लांट ग्रामीण बिज़नेस में सबसे तेज़ अपनाई जा रही तकनीक है. लगभग 22 किलो गोबर से 1 किलो बायोगैस तैयार होती है जिसे घर के उपयोग से लेकर छोटे व्यावसायिक इकाइयों तक ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. छोटे घरेलू प्लांट 15,000 रुपये से शुरू हो जाते हैं जबकि सामुदायिक या बड़े प्लांटों की लागत इससे कई गुना अधिक होती है. उत्पादित बायोगैस से परिवार का ईंधन खर्च बचता है और साथ ही स्लरी के रूप में हाई क्वालिटी की जैविक खाद भी तैयार होती है जिसे बेच के भारी मुनाफा मिलता है.

जैविक खाद का बाज़ार

जैविक खाद के उत्पादन में गोबर मुख्य कच्चा माल है और इसकी मांग हर सीज़न के साथ बढ़ रही है. शुरुआती लागत कम होने के कारण किसान छोटे स्तर पर भी इसे शुरू कर सकते हैं. खाद को पैक कर किसान स्थानीय मंडियों, नर्सरी, कृषि केंद्रों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक बेच सकते हैं. यह खेती से जुड़ा एक स्थायी बिज़नेस है जिसकी मांग में कमी नहीं आती.

दूध प्रोसेसिंग, घी पनीर से बढ़ती दोगुनी कमाई

दूध प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर किसान घी, पनीर और अन्य डेयरी प्रोडक्ट्स बनाकर अपनी आय को कई गुना बढ़ा रहे हैं. इसके लिए मशीनें, पैकिंग सामग्री और लाइसेंस की आवश्यकता होती है. छोटे स्तर पर यह सेटअप 50,000 से 1 लाख रुपये तक में शुरू किया जा सकता है. प्रोसेस्ड डेयरी प्रोडक्ट्स की शेल्फ लाइफ़ अधिक होती है और स्थानीय बाजारों में इनकी बिक्री तेज़ी से होती है जिससे किसानों को निश्चित और बेहतर मुनाफा मिलता है.

PMFME योजना दे रही पूंजी सब्सिडी और तकनीकी सहयोग

ग्रामीण उन्नयन विस्तार अधिकारी सुधा पटेल ने लोकल 18 को बताया कि किसान पीएमएफएमई योजना के तहत अपनी प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित कर अपने ब्रांड नाम से उत्पाद बेच सकते हैं. इस योजना में 35% तक पूंजी सब्सिडी और 10 लाख रुपये तक ऋण, आईएफ के तहत 3% ब्याज सहायता, तकनीकी प्रशिक्षण, पैकेजिंग, डिज़ाइन, प्रक्रिया विकास जैसी सुविधाएं शामिल हैं.

आवेदन ऑनलाइन पीएमएफएमई पोर्टल या विकासखंड के उन्नयन कार्यालय में ऑफलाइन किया जा सकता है. पात्रता में 18-40 वर्ष आयु, पेंशनधारी/टैक्सपेयर न होना और किसी बकाया लोन का ना होना जरूरी है.