अगस्त-सितंबर में जोखिम में आ सकती हैं कई तैयार फसलें,बहुत भारी बारिश का अनुमान

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जून के आखिरी सप्ताह से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून में तेजी देखी गई थी. इससे देश के कई हिस्सों में बारिश की कमी से उबरने में सफलता मिली है. इससे देश भर में बारिश का आंकड़ा सामान्य से 2 प्रतिशत अधिक हो गया है. हालांकि, इसमें उत्तर-पश्चिम भारत में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान जैसे प्रमुख खेती वाले राज्य शामिल हैं, जहां लगातार दो महीनों तक कम बारिश हुई, जबकि जुलाई में यह सामान्य से 13 प्रतिशत कम रही. 

जून-जुलाई के दौरान पूरे भारत में 453.8 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 445.8 मिमी होती है. वहीं, अधिकांश राज्यों में पहले दो महीनों में काफी अच्छी बारिश हुई है. इसके अलावा झारखंड, बिहार सहित पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्से में कम बारिश से किसान परेशान हैं.

जुलाई में हुई 36 फीसदी अधिक बारिश 

जुलाई में दक्षिणी प्रायद्वीप में 279.2 मिमी बारिश हुई, जबकि बारिश का औसत 204.5 मिमी है, जो 36.5 प्रतिशत अधिक है, जबकि जून में यह सामान्य से 14.2 प्रतिशत अधिक थी. गुरुवार को मीडियाकर्मियों को जानकारी देते हुए आईएमडी के महानिदेशक एम महापात्रा ने कहा कि जुलाई में बहुत भारी वर्षा की घटनाओं (11.56-20.45 सेमी) और अत्यधिक भारी वर्षा की घटनाओं (20.45 सेमी से अधिक) की संख्या क्रमशः 1,030 और 193 थी जो पिछले पांच वर्षों में इस महीने के लिए दूसरी सबसे अधिक है.

अगस्त में सामान्य बारिश की भविष्यवाणी

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगस्त में सामान्य बारिश की भविष्यवाणी की है, लेकिन अगस्त-सितंबर की अवधि के दौरान ‘सामान्य से अधिक’ वर्षा का भी अनुमान लगाया है, जो मॉनसून सीजन के आखिरी महीने में अधिक वर्षा का संकेत देता है. ये भविष्यवाणी संभावित रूप से कटाई के लिए तैयार खड़ी खरीफ फसलों के लिए जोखिम साबित हो सकती है. जुलाई में वास्तविक वर्षा और मॉनसून सीजन के दूसरे भाग के दौरान संभावित वर्षा के बारे में मीडिया को संबोधित करते हुए आईएमडी के महानिदेशक एम महापात्रा ने कहा कि अगस्त-सितंबर 2024 के दौरान पूरे देश में वर्षा सामान्य से अधिक होने की संभावना है. हालांकि, उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के कई हिस्सों और पूर्वी भारत के आस-पास के इलाकों जैसे  लद्दाख, सौराष्ट्र और कच्छ, मध्य और प्रायद्वीपीय क्षेत्रों के कुछ अलग-अलग इलाकों में “सामान्य से कम” बारिश हो सकती है. 

सितंबर में अधिक बारिश होने की संभावना

वहीं, आईएमडी ने इस महीने के लिए एक अलग पूर्वानुमान जारी किया है, जिसमें भविष्यवाणी की गई कि मध्य और उससे सटे उत्तरी प्रायद्वीपीय भारत के दक्षिणी हिस्सों, उत्तर-पूर्व और पूर्वी भारत के आस-पास के इलाकों, के कुछ हिस्सों को छोड़कर पूरे देश में बारिश “सामान्य” होगी. सितंबर में अधिक बारिश की संभावना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अगस्त की तुलना में सितंबर में अधिक बारिश होने की संभावना है क्योंकि ला नीना का स्थितियां तैयार हो रही हैं.

सोयाबीन की फसल को हो सकता है नुकसान 

महापात्रा ने कहा कि मध्य भारत, जो कृषि के लिए मॉनसून की बारिश पर बहुत अधिक निर्भर करता है, वहां लगातार तीसरे मॉनसून सीजन में अच्छी बारिश हो रही है, जिससे विशेष रूप से कपास, सोयाबीन और दलहन फसलों को मदद मिलने की संभावना है. हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने कहा कि सितंबर में सामान्य से अधिक बारिश के कारण मध्य प्रदेश में सोयाबीन की फसल को नुकसान हो सकता है. इसके अलावा प्रमुख कृषि राज्यों में से हरियाणा और पंजाब में बारिश की भारी कमी रही है, फिर भी वर्तमान बारिश और आने वाले सप्ताहों में सामान्य बारिश की संभावना से खरीफ फसलों को कोई खतरा नहीं होगा क्योंकि ये राज्य अत्यधिक सिंचित हैं.