देश के अधिकांश सूबों में रबी सीजन की प्रमुख कृषि उपज गेहूं की सरकारी खरीद शुरू हो चुकी है. केंद्र सरकार ने रबी मार्केटिंग सीजन 2025-26 में पूरे देश के लिए इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2425 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जबकि हर राज्य में लागत अलग-अलग आती है. कुछ किसान संगठन इसी एमएसपी की लीगल गारंटी मांग रहे हैं. दूसरी ओर कुछ अर्थशास्त्री ऐसा माहौल बना रहे हैं कि गारंटी दी गई तो महंगाई बढ़ जाएगी. जबकि, राज्य सरकार ने अपने यहां की लागत के मुताबिक केंद्र को गेहूं की एमएसपी का जो प्रस्ताव भेजा था, उसमें भारी कटौती करने के बाद यह सरकारी दाम फिक्स हुआ है. केंद्र ने एमएसपी तय करके वक्त विशेष तौर पर महंगाई का ध्यान रखा. ऐसे में एमएसपी की गारंटी देने से महंगाई कैसे बढ़ जाएगी.MSP: अलग-अलग राज्यों में फसल उत्पादन की अलग लागत आने के बावजूद केंद्र सरकार देश भर के लिए एक ही एमएसपी तय कर देती है. हालांकि, कोई भी राज्य एमएसपी के ऊपर जरूरत के हिसाब से अपने किसानों को बोनस दे सकता है, लेकिन केंद्र सरकार इस तरह की किसी भी कोशिश को ठीक नहीं मानती. उपभोक्ताओं के हित के लिए सरकार किसानों की जेब पर कैंची चला देती है.
बहरहाल, यह भी जान लीजिए कि किस राज्य ने गेहूं की कितनी एमएसपी मांगी थी. उससे अंदाजा लगाईए कि राज्यों के प्रस्ताव पर केंद्र ने कितनी बड़ी कटौती की है. महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र से गेहूं की एमएसपी 4461 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की थी, गुजरात ने 4050 रुपये और पश्चिम बंगाल ने 3350 प्रति क्विंटल की मांग उठाई, लेकिन सबकी मांगों को रिजेक्ट कर दिया गया. औसत निकालकर यह बताया गया कि देश में किस फसल की कितनी लागत है और उस आधार पर एमएसपी कितनी होगी. इस व्यवस्था की वजह से कुछ राज्य एमएसपी का मजा ले रहे हैं तो कुछ के लिए एमएसपी एक बेमानी शब्द बनकर रह गया है.
कैसे मिलेगा लाभ?
राज्यों से आई सिफारिशों को दरकिनार करते हुए केंद्र सरकार ने औसत निकालकर यह बताया कि गेहूं की संपूर्ण लागत (C2 Cost) 1720 रुपये प्रति क्विंटल आई है. हालांकि सरकार ने सी-2 लागत के आधार पर एमएसपी तय नहीं किया. सरकार ने गेहूं की A2+FL फार्मूले के आधार पर उत्पादन लागत 1182 रुपये माना. इस पर 105 फीसदी का मुनाफा देकर पूरे देश के लिए 2425 रुपये प्रति क्विंटल की एमएसपी तय कर दी. अब यहां सवाल यह है कि कैसे औसत दाम तय करने से किसानों को लाभ हो सकता है?
बोनस दे सकता है राज्य
अलग-अलग राज्यों में फसल उत्पादन की अलग लागत आने के बावजूद केंद्र सरकार देश भर के लिए एक ही एमएसपी तय कर देती है. हालांकि, कोई भी राज्य एमएसपी के ऊपर जरूरत के हिसाब से अपने किसानों को बोनस दे सकता है, लेकिन केंद्र सरकार इस तरह की किसी भी कोशिश को ठीक नहीं मानती.
हालांकि, रबी मार्केटिंग सीजन 2024-25 में केंद्र सरकार ने 2275 रुपये एमएसपी तय की थी. जबकि राजस्थान और मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने वादा किया था कि वो सत्ता में आई तो इन दो सूबों में गेहूं का एमएसपी 2700 रुपये प्रति क्विंटल होगा. यानी राज्य सरकार 425 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बोनस देगी. लेकिन जब दोनों राज्यों में बीजेपी सत्ता में आई तो सरकार इस बात से मुकर गई. सिर्फ 125 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस दिया.
धान का कितना दाम?
केंद्र ने खरीफ मार्केटिंग सीजन 2024-25 के लिए धान की एमएसपी 2300 रुपये क्विंटल तय की थी. जबकि उस साल के लिए महाराष्ट्र ने धान की एमएसपी 4661 रुपये प्रति क्विंटल मांगी थी. केरल ने 3690 रुपये और कर्नाटक सरकार ने 3426 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी की मांग की थी. उत्तर प्रदेश ने 3000 और बिहार सरकार ने 3201 रुपये की डिमांड की थी. तेलंगाना ने 5428 और उत्तर प्रदेश सरकार ने 3000 रुपये प्रति क्विंटल की एमएसपी मांगी थी.
केंद्र ने कितनी मानी लागत
राज्य सरकारों ने केंद्र से अपने सूबे के लिए चाहे जितनी एमएसपी का प्रस्ताव दिया हो लेकिन, उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. केंद्र ने देश में धान की संपूर्ण लागत (C2 Cost) महज 2008 रुपये प्रति क्विंटल मानी. ताज्जुब यह है कि सी-2 कॉस्ट बताने के बावजूद केंद्र सरकार ने उसे माना नहीं. सरकार ने A2+FL फार्मूले के आधार पर धान की उत्पादन लागत को प्रति क्विंटल 1533 रुपये बताया और उस पर न्यूनतम 50 फीसदी मुनाफा जोड़कर 2300 रुपये एमएसपी तय कर दी. राज्यों के प्रस्तावों पर इतनी कटौती के बावजूद कुछ लोगों को लगता है कि एमएसपी की लीगल गारंटी मिलने के बाद महंगाई बढ़ जाएगी.
यूपी ने नहीं दिया प्रस्ताव
कृषि लागत एवं मूल्य आयोग के अनुसार रबी मार्केटिंग सीजन 2025-26 के दौरान गेहूं की एमएसपी के लिए आठ राज्यों ने सिफारिश दी है, लेकिन चार सूबों ने कोई प्रस्ताव नहीं दिया. इनमें गेहूं का सबसे बड़ा उत्पादक उत्तर प्रदेश भी शामिल है. इसके अलावा राजस्थान, हरियाणा और छत्तीसगढ़ से भी गेहूं की एमएसपी को लेकर केंद्र सरकार को कोई सिफारिश या सुझाव नहीं दिया गया है.