बिजनेस छोड़ खेती से किया प्यार, बेर से कमा रहे लाख रुपये सालाना

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हर इंसान अपने जीवन में सफल होना चाहता है. सफलता पाने के लिए हर किसी के पास अपने अलग-अलग मापदंड होते हैं. कोई सरकारी नौकरी पाना चाहता है, तो कोई सफल डॉक्टर, इंजीनियर या फिर बिजनेसमैन बनना चाहता है. लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो किसान बनना चाहते हैं. हालांकि, आज हम आपको एक ऐसे युवा की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने एक सफल बिजनेसमैन बनने के बावजूद सब कुछ छोड़कर खेती को अपनाया और आज ऑस्ट्रेलियन बेर की खेती करके सालाना 20 लाख रुपये से अधिक की कमाई कर रहे हैं.

राजधानी पटना से करीब 200 किलोमीटर दूर, रोहतास जिले के तिलौथू ब्लॉक के इंद्रपुरी पंचायत के रहने वाले दिनेश कुमार सिंह अपने साढ़े तीन बीघा जमीन पर बेर सहित 20 तरह की अलग-अलग फसलों को उगा रहे हैं.

बिजनेसमैन से किसान बनने का सफर

दिनेश कुमार बताते हैं कि तिलौथू में उनकी खुद की इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान थी, जहां 10 से 12 लोग काम करते थे. महीने में एक से डेढ़ लाख रुपये की कमाई हो जाती थी. लेकिन खेती के प्रति विशेष लगाव के कारण उन्होंने 2006 में अपनी दुकान बंद कर दी. खेती में कुछ नया सीखने की चाह में वे राजस्थान चले गए. वहां उन्होंने भीलवाड़ा में जीवनयापन के लिए चाय-नमकीन की दुकान खोली. वहां भी चार साल में महीने की कमाई एक से डेढ़ लाख रुपये तक पहुंच गई. इसी दौरान उन्होंने हरियाणा से हॉर्टिकल्चर और औषधीय खेती से जुड़ी पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, कोरोना काल के दौरान वे अपने गांव वापस लौट आए और कृषि के क्षेत्र में कुछ नया करने की सोच के साथ बेर की खेती करने का फैसला किया.

किराए की जमीन पर शुरू की की खेती

गांव लौटने के बाद उनके पास खुद की जमीन नहीं थी, इसलिए उन्होंने गांव में ही साढ़े तीन बीघा जमीन किराए पर ली और वहां बेर के दो किस्मों के पेड़ लगाए, ऑस्ट्रेलियन रेड और ऑस्ट्रेलियन गोल्ड. इसके अलावा उन्होंने ताइवान ग्रीन सहित मिस इंडिया, कश्मीरी रेड जैसी वैरायटी के बेर लगाए हुए हैं. दिनेश कुमार ने अपनी जमीन पर करीब 850 बेर के पौधे लगाए हैं. ऑस्ट्रेलियन गोल्ड, ऑस्ट्रेलियन रेड बेरों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनका गूदा अधिक होता है और स्वाद में यह सेब की तरह मीठे होते है. इसके अलावा, ये स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होते हैं और लोग सर्दी-खांसी, शुगर जैसी बीमारियों के इलाज के लिए भी इनका सेवन करते हैं. इन पौधों से साल में पांच महीने तक फल मिलते हैं, जिनमें ऑस्ट्रेलियन रेड बेर का फल जनवरी से अप्रैल तक आता है. वहीं ऑस्ट्रेलियन गोल्ड में नवंबर से जनवरी में फलों का हार्वेस्ट होता है.

खेत से ही लोग खरीदकर ले जाते हैं बेर

प्रगतिशील किसान दिनेश कुमार ने प्रति बीघा करीब 250 बेर के पौधे लगाए हैं. एक पौधे से लगभग 50 किलो से लेकर एक क्विंटल तक बेर का उत्पादन होता है. वे बताते हैं कि उन्हें अपने फलों को बाजार में बेचने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि लोग खुद उनके खेत में आकर बेर खरीदते हैं. वे पांच से सात ट्रॉली बेर आसानी से बेच देते हैं. जो ग्राहक उनके खेत में बेर खरीदने आते हैं, उन्हें वे पहले भरपेट बेर खिलाते हैं. उनका कहना है कि आधा फल तो लोगों को खिलाने में ही खर्च हो जाता है. वे प्रति किलो बेर 50 से 100 रुपये तक बेचते हैं, जिससे सालाना केवल बेर की खेती से लगभग 20 लाख रुपये की कमाई हो जाती है, जो उनके लिए बेहद संतोषजनक है. 

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