इंदौर के गांवों में हिरण, नील गाय रौंद रहे खेतों को, फसलें चौपट होने से किसान परेशान

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चंदन बडवाया

इंदौर के मांगलिया क्षेत्र के आसपास के दस से ज्यादा गांवों के किसान अपने खेतों में नील गाय, हिरण के झुंडों की मौजूदगी के कारण परेशान हो गए है। रात को या सुबह के समय हिरण आते है और खेतों में लगी फसलें खाते है और दौड़ लगाकर उन्हें रौंदते भी है। किसान उनसे अपनी फसल बचाने के लिए तरह-तरह के जतन कर रहे है, लेकिन उनकी तादाद इतनी होती है कि वे खेतों से नहीं भागते है। किसानों ने अब अफसरों से मुलाकात कर मुआवजा भी मांगा है।किसान खुद रात में फसलों को बचाने के लिए जाते है। उनका कहना है कि  फसलों को झुंड से बचाने के लिए पटाखों को उपयोग भी करते है। लाल रंग की साडि़यों से भी फसलों को कवर करना पड़ता है। रात के समय हमें जागना कड़ाके की ठंड में जागना पड़ रहा है। 

देवास के जंगल से आने वाले हिरण, नील गाय के झुंड इंदौर जिले के सुलाखेड़ी,कदावली बुजुर्ग,व्यासखेड़ी,गोंदाल्या सहित दस से ज्याद गांवों के में देखे जा सकते है। ये वन्य प्राणी रात को या अलसुबह आते है और फसलों को नुकसान पहुंचाते है। खेतों में किसानों ने गेंहू, प्याज के अलावा हरी सब्जियां लगाकर रखी है। जो हिरणों के झुंड के रौंदने से खराब हो रही है। किसानों का कहना है कि हम वन्य प्राणियों को नुकसान नहीं पहुंचा सकते, लेकिन सरकार को भी हमारे बारे में सोचना चाहिए।

रात को करना पड़ती है चौकीदारी

फसलों को बचाने के लिए किसान खुद रात में चौकीदारी करते है। उनका कहना है कि रोशनी से वन्य प्राणी डरते है। हमें खेतों में लाइट लगाना पड़ती है। इसके अलावा झुंड भगाने के लिए कई बार पटाखों को उपयोग भी करते है। लाल रंग की साडि़यों से भी फसलों को कवर करना पड़ता है। तमाम प्रयासों के बाद भी हमें नुकसान हो रहा है। किसान बाबू चौधरी ने कहा कि अब तो जंगली सुअर भी खेतों में आने लगे है। कई बार मौसम की मार के कारण फसल में नुकसान होता है और जानवरों के खेतों में घुस आने से भी फसल खराब हो जाती है।

किसान बाबू चौधरी ने बताया कि उनके खेत में कई बार हिरणों के झुंड आ चुके है। बोनी के बाद आए पौधों को हिरण नष्ट कर देते है। वे खेतों में दौड़ लगाते है। इससे ज्यादा नुकसान होता है। किसान संजय पाटीदार का कहना है कि यह समस्या कई वर्षों से है, लेकिन अब हिरणों की संख्या बढ़ने लगी है। ठंड के दिनों वे ज्यादा खेतों में दिखाई देते है। वन विभाग को जंगल से गांव तक हिरणों के न आने के प्रबंध करना चाहिए। उनके शिकार का खतरा भी रहता है। कई बार हिरणों के पीछे तेंदुए भी गांव में घुस आते है।