खरगोन में 3 बोरी खाद को तरसे किसान, भूखे-प्यासे इंतजार में खड़ी महिलाएं-छात्राएं,यूक्रेन और इजरायल युद्ध को कृषि मंत्री ठहरा रहे हैं जिम्मेदार

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मध्य प्रदेश में खाद को लेकर किसानों की पीड़ा एक बार फिर सामने आई है। खरगोन जिला मुख्यालय पर यूरिया खाद की परेशानी और बढ़ गई है। यहां हालात इतने बिगड़ गए हैं कि किसान अपने परिवार के साथ देर रात से लाइन में लग रहे हैं। इसमें हाउसवाइफ और स्कूल कॉलेज जाने वाली छात्राएं भी शामिल है।

सहकारी सोसाइटी में यूरिया खाद नहीं मिलने से परेशान किसान खाद की तीन बोरी के लिये जिला मुख्यालय पर पहुंच रहे हैं। यहां राज्य सहकारी विपणन संघ के ऑफिस के बाहर देर रात से ही लंबी कतारें लग जाती हैं। किसान कई किमी की दूरी तय कर जिला मुख्यालय ऑफिस पर पहुंच रहे हैं।

खास बात यह है कि घर का कामकाज छोडकर महिलाएं और कॉलेज में पढने वाली स्टूडेंट्स पढाई छोडकर रात में ही खाद लेने पहुंच जाती है। तीन बोरी खाद के लिये आधार कार्ड सहित आवश्यक दस्तावेजों की खाद के टोकन लेने के लिये अनोखी लाईन लगती है।

पत्थर के नीचे दस्तावेज रखकर किसान और उनके परिजन टोकन के लिये लाईन लगाते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में सोसाइटी में खाद नहीं मिलने पर सैकड़ों किसान परिवार विपणन संघ के ऑफिस पहुंच रहे हैं। वे करीब 50 से 60 किलोमीटर दूर से रात में पहुंच जाते हैं। जबकि खाद का गोदाम सुबह 11 बजे ऑफिस समय में खुलता है।

गोदाम से पहले ही भीड़ इतनी हो जाती है कि लोग टूटी दीवार कूदकर भीतर घुसने को मजबूर हो जाते हैं। बुधवार को मचे हंगामे के बाद एसडीएम बीएस क्लेश ने मौके पर पहुंचकर दो खिड़कियों से खाद वितरण की अस्थाई व्यवस्था करवाई।

खरगोन के कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर एसएस राजपूत ने बताया कि जिले में करीब 4.20 लाख हैक्टेयर रकबे में खरीफ फसलों की बोवनी प्रस्तावित है। इसमें मुख्य रूप से सोयाबीन 1.12 लाख, मक्का 70000 और कपास 1.90 लाख हैक्टेयर शामिल है। उन्होंने बताया कि यूरिया की सप्लाई लगातार जारी है। किसान इकट्ठे न ले जाकर आवश्यकता के अनुसार इसे ले जाएं। उन्होंने कहा कि किस ज्यादा है और इसलिए उस अनुपात में खाद का वितरण किया जा रहा है।

राजपूत ने बताया कि महिलाओं और स्टूडेंट को कई ऋण पुस्तिका के साथ आने की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए उनके पेरेंट्स को समझाइए दी गई है। उन्होंने बताया कि खाद का वितरण आधार बेस्ड पीओएस सिस्टम से हो रहा है। कलेक्टर भव्या मित्तल ने मामले की जानकारी मिलने पर हायर ऑफिशियल्स से चर्चा की है।

कृषि विभाग के अधिकारी ने बताया कि बोवनी के समय डीएपी खाद की आवश्यकता होती है। लेकिन हमने पिछले वर्ष और इस बार कमी के विकल्प के तौर पर कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने बताया कि कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर में सभी तत्व उपलब्ध हैं जिससे अच्छी उत्पादकता भी मिलती है।

अधिकृत जानकारी के अनुसार खरीफ फसल के लिए 172600 मैट्रिक टैंक उर्वरक की मांग है और फिलहाल 62014 मेट्रिक टन उपलब्धता है। फसल के रास्ते में 0.77% की वृद्धि भी हुई है। उधर खाद की समस्या को लेकर कल बड़वानी जिले के सेंधवा में लोगों ने सेंधवा खेतिया राजमार्ग को एक घण्टे के लिये ब्लॉक कर दिया।

यूक्रेन और इजरायल युद्ध को कृषि मंत्री ठहरा रहे हैं जिम्मेदार

एमपी में खाद की कमी के कारण हाहाकार मचा हुआ है। इसके कारण किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कड़ाके की ठंड में भी वे लाइन लगाकर सरकारी गोदामों के बाहर इंतजार कर रहे हैं। कहीं कहीं किसानों ने इन परेशानियों से तंग आकर प्रदर्शन और चक्का जाम भी किए हैं। वहीं इस पर सत्ताधारी सरकार के मंत्री का कहना है कि प्रदेश में खाद की कमी यूक्रेन और इजरायल युद्ध है।

खाद की कमी को लेकर मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंषाना ने बड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि किसानों को उनके मांग के अनुसार पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। अन्नदाताओं को फसल बोनी के समय के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराया गया है। उनका दावा है कि प्रदेश में उर्वरक की कमी नहीं हुई है। वहीं कई जिलों में इसे लेकर किसानों के उग्र प्रदर्शन भी देखे जा चुके हैं। शिवपुरी में किसानों ने खाद की कमी को लेकर चक्का जाम तक कर दिया था।

किसानों की जरूरतों के लिए संवेदनशील है सरकार

वहीं कृषि मंत्री एंदल सिंह कंषाना का कहना है कि एमपी सरकार, किसानों की जरूरतों के प्रति बहुत संवेदनशील रही है। वहीं प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को उचित दर पर बीज उपलब्ध कराया गया है।

खाद की कमी पर कृषि मंत्री का कहना

वहीं डीएपी की आपूर्ति में कुछ दिक्कतें आई हैं। यूक्रेन युद्ध, इज़राइल युद्ध और स्वेज नहर की समस्याओं के कारण डीएपी की शिपमेंट अफ्रीका के रास्ते आ रही है, जिससे समय ज़्यादा लग रहा है। डीएपी की कीमतें भी बढ़ गई हैं। लेकिन प्रधानमंत्री के प्रयासों से डीएपी पर 3500 रुपये प्रति टन की सब्सिडी मिल रही है।

अन्नदाताओं को आर्थिक मदद

किसानों को आर्थिक मदद देने के लिए सरकार ने 2023-24 में 19900 करोड़ रुपये का कर्ज बिना ब्याज के दिया है। इससे लगभग 33 लाख किसानों को फायदा हुआ है। ब्याज में लगभग 975 करोड़ रुपये की बचत हुई है। वहीं नहरों के माध्यम से वर्ष 2007-08 में सिंचित क्षेत्र 7.50 लाख हेक्टेयर था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर लगभग 50.46 लाख हेक्टेयर हो गया है। इससे किसानों को लाभ मिला है।