इफको नैनी यूरिया के दो छिड़कावों से चावल के दाने की उपज में 13 प्रतिशत की कमी हो गई और गेहूं के दाने की उपज में 17.2% की कमी
बबलू जाधव/चंदन बड़वाया
ना कमाल दिखा पाया, ना कोई हरकत कर पाया… कर पाया तो केवल फसल की पैदावार को कम कर पाया
नैनो यूरिया को लाने में सहकारी मंत्रालय जोर-जोर से ढोल बाजे बजा रहे थे। नैनो को एक चमत्कारिक घुलनशील छिड़काव में उपयोगी आवश्यक नाइट्रोजन की पूर्ति करने वाला तत्व बता रहे थे, परंतु क्या मालूम इस नैनो ने कई किसानों के नैनों की नींद उड़ा दी है।
हर खाद के कट्टे के साथ जबरदस्ती इसको टैगिंग कर किसानों को जबरदस्ती उनके गले में फांद दिया, जिसकी कीमत किसानों ने बहुत बड़ी चुकाई है, अपनी खून पसीने की कमाई इस नैनी यूरिया में लगाई है।
केंद्र सरकार तो चाह रही थी कि कोई भी किसान यूरिया खाद की खरीदी ना करें, केवल नैनों ही अपने खेतों में डाले। केंद्र सरकार इस नैनो के भरोसे में यह समझ रही थी कि यूरिया की लाइन यह नैनो खत्म कर देगी। परंतु पंजाब कृषि विश्वविद्यालय और अन्य संस्थाओं द्वारा नैनी यूरिया के उपयोग पर किए गए अनुसंधान से पता चलता है कि चावल गेहूं रोटेशन में इफको नैनी यूरिया के दो छिड़कावों से प्राप्त आंकड़ों में बताया गया कि चावल के दाने की उपज में 13 प्रतिशत की कमी हो गई और गेहूं के दाने की उपज में 17.2% की कमी आ गई।
इफको ने भी बड़ी चालाकी से और बड़ी तैयारी के साथ बिना परीक्षण किए विना कृषि वैज्ञानिक से ट्रायल कराए बिना इसको पूरे भारत के किसानों पर जबरदस्ती गले की घंटी बनाकर गांव गांव में बजवा दिया।
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने साफ तौर पर नैनों यूरिया के उपयोग पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया। यहां तक की इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर द्वारा भी चावल की उपज में 8% की कमी और इसी प्रकार रागी की उपज में 12% की कमी बताई। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की कई एजेंसियों ने अपने विभिन्न प्रक्षेपण में ट्रायल कर प्रयोग पर मिली जुली प्रतिक्रिया व्यक्ति की है। केंद्र सरकार ने भी माना को चावल और गेहूं में प्रोटीन की मात्रा 35% और 24% की कमी हो गई है।
आर कालिया, ए आहूजा, आर सिद्ध द्वारा ‘प्लांट एंड सॉइल’ में प्रकाशित अपने लेख में बताया है कि नैनो की उपयोग से नाइट्रोजन असिमिलेशन की कमी हो गई है।
इफको को ऐसी क्या जल्दी पड़ी थी कि icar में प्रक्षेत्र परीक्षण किए बिना पूरे भारत और विदेशों में अपने नैनो यूरिया को लांच कर दिया। यह केवल अब पानी की एक बोतल के रूप में दिखाई दे रही है? क्योंकि इसका परिणाम और परीक्षण यूरिया खाद की पूर्ति करने में सक्षम नहीं है और साथ ही साथ उत्पादन भी कम हो गया। जहां गेहूं और चावल का उत्पादन नैनो यूरिया से कम हो गया तो किसानों को डबल मार लगी, पैसा भी गया और पैदावार भी कम।
एक बोरी यूरिया पर जबरदस्ती एक बोतल पकड़ा दी गई, यदि कोई किसान 10 बेग यूरिया ले रहा है तो 10 बोतल नैनो की पकड़ा दी गई। कई को पानी से भरी यह
बोतल की कीमत 240 रुपए देकर चुकानी पड़ी। कुल मिलाकर इफको कंपनी ने 3 साल के अंदर अंदर 25000 करोड रुपए किसानों से वसूल लिए। जब नैनों उड़िया से पेट नहीं भरा तो एक नया नैनो डीएपी लॉन्च कर दिया। उसकी भी 200 लाख बोतल किसानों जबरदस्ती पकड़ा दी
पूरे देश में सबसे ज्यादा महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के किसानों को इफको ने पानी से भरी नैनी यूरिया और नैनो डीएपी की बोतल से लूटा। केंद्र सरकार ने इफको से अपना किसी भी प्रकार का संबंध न होने का हवाला दे दिया है। केंद्र सरकार ने कहा है कि इफको के प्रोडक्शन में केंद्र सरकार की किसी भी प्रकार की भूमिका नहीं है।
साफतौर पर पल्ला झाड़ने से स्पष्ट हो रहा है कि नैनो ने किसानों के नैनों (आंखों) से काजल चुरा कर 25000 करोड़ का माल कमा लिया है
इफको ने भी गजब की मनमानी कर दी और केंद्र सरकार ने आंखें बंद कर लीं
जैसा की कीटनाशक का पंजीयन करने के पहले कई सालों तक इसका ट्रायल विभिन्न प्रकार में होता है परंतु यहां इफको ने दादागिरी दिखाते हुए बिना कोई ट्रायल प्राप्त किया और किसी प्रकार का विशेष अप्रूवल लिए बिना नैनो यूरिया को कमाई की बोतल बना दी।
इफको के अलावा कई उर्वरक निमार्ता कंपनी जबरदस्ती कई बेमतलब के उत्पादों की टैगिंग करके जबरदस्ती किसानों को दे रही है। केवल वह यूरिया के साथ बे-मतलब के उत्पाद बेच रही हैं।
हरियाणा सरकार ने अभी चंबल फर्टिलाइजर एंड केमिकल टैगिंग करते हुए दोषी पाया कंपनी का लाइसेंस सस्पेंड किया है वह भी अपने यूरिया के साथ जबरदस्ती अन्य उत्पाद बेच रही थी।
इफको ने 2022 से लेकर 2025 के दरमियान पूरे देश में लगभग 900 लाख बोतल किसानों को बेच दी इसमें मध्य प्रदेश में 36 लाख बोतल किसानों के हवाले कर दिया तो महाराष्ट्र में आगे बढ़कर 75 लाख बोतल किसानों के गले में टांग दी। कुल मिलाकर 25000 करोड रुपए किसानों से वसूल लिए गए।




