खेती के लिए मिट्टी का स्वास्थ्य कैसे सुधारे ताकि फसल उत्पादन हो बंपर

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मिट्टी के स्वास्थ्य को खेती शुरू करने से पहले सही करना होता है तब जाकर किसान की मेहनत रंग लाती है। खेती शुरू करने से पहले मिट्टी की जांच यानी मृदा परीक्षण करें जिससे ये पता चलता है की कौन से पोषक तत्वों की कमी है और मिट्टी की प्रकार कौन सा है। ज्यादातर खेतों में तीन तरह की मिट्टी पाई जाती है जैसे रेतीली,चिकनी और दोमट मिट्टी। जिनमें से दोमट मिट्टी को खेती के लिए अच्छा माना जाता है क्योंकि इसमें रेत,कीचड़ और मिट्टी तीनों ही संतुलित मात्रा में रहता हैं।

खेती के लिए मिट्टी तैयार करते समय वायु,ph,बनावट,नमी और पोषक तत्वों को संतुलित करना बहुत जरुरी होता है।

ये कुछ चीजें जो मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए करना बहुत जरूरी होता हैं
मिट्टी की जुताई – मिट्टी की जुताई बहुत जरुरी होती है। जुताई से मिट्टी ढीली होती है और हवा पौधों की जड़ों तक पहुँचती है जिससे पौधे की जड़े अच्छे से बढ़ती हैं। जुताई के लिए अच्छे कृषि उपकरणों का इस्तेमाल करें।
सतह की जुताई – साधारण जुताई होने के बाद सतह की जुताई की जाती है, जिसमें ये होता है कि मिट्टी के बड़े टुकड़े छोटे और महीन दुकड़े में टूट जाते हैं । इसके साथ ही खेत की नमी भी बनी रहती है।
खेत समतलीकरण – इससे ये होता है कि खेतों को समतल किया जाता है, जिससे पानी खेत में एक बार्रबर फ़ैल जाती है और मिट्टी कटती भी नहीं है।
जैविक पदार्थ मिलाना और मृदा संशोधन- जैविक खेती हम सब जानते है की मिट्टी के लिए बहुत लाभदायक होती है। खाद,कम्पोस्ट और जैविक पदार्थ मिलाने से मिट्टी उपजाऊ बनती है जिससे उत्पादन बहुत बंपर होती है।
मिट्टी की उपजाऊ ता उसके कार्बनिक पदार्थ,खनिज,सूक्ष्मजीव,पानी ह्यूमस और हवा जैसे तत्वों पर निर्भर करती है इसलिए इन सब की गुणवत्ता बनाए रखने से लिए इन पोषक तत्वों का संतुलन जरुरी है।
इन सब चीजों को अपनाने से मिट्टी हमेशा स्वस्थ बनी रहती है और फसल के उत्पादन और गुणवत्ता में काफी सुधार आता है।