*गिलोय का रस डेंगू-मलेरिया, गठिया, डायबिटीज में रामबाण*

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आयुर्वेद में इस औषधि को अमृता कहा गया है. यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ बुखार, खांसी-जुकाम, डेंगू, मलेरिया में लाभकारी मानी गई है. नीम पर चढ़ने से इसके गुण बढ़ते हैं. लिवर, डायबिटीज, जोड़ों के दर्द और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है. जानें सब…

अगर घर के आसपास नीम, पीपल, बरगद का पेड़ है तो फिर आप एक बेलनुमा कड़वा पौधा उसके पास जरूर लगा दीजिए. ये पौधा जैसे-जैसे बड़ा होगा, इसकी बेल पेड़ पर चढ़ती जाएगी. यही नहीं, ये पौधा उस पेड़ की ताकत को चूस लेगा. जब आप इस बेल का सेवन करेंगे तब उस पेड़ की सारी ताकत आपके शरीर में ट्रांसफर हो जाएगी. बात अटपटी लग रही होगी, लेकिन आयुर्वेद में इस बेलनुमा पौधे को लेकर यह दावा प्राचीन समय से किया जा रहा है. आयुर्वेद इस पौधे के रस को प्राकृतिक लिवर टॉनिक मानता है, जो शरीर को अंदर से मजबूती प्रदान करता है.

जी हां, यहां बात गिलोय की हो रही है, जो एक आयुर्वेदिक औषधि है. इसे गमले में भी उगाया जा सकता है. प्राचीन काल से ही आयुर्वेद में गिलोय का उपयोग कई गंभीर बीमारियों के उपचार में किया जाता रहा है. कोरोना काल के दौरान गिलोय के उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई थी. यह एक बेलनुमा पौधा है, जिसकी खासियत है कि यह जिस पेड़ पर चढ़ती है, उसी के औषधीय गुणों को अपने भीतर समाहित कर लेती है. गिलोय को अमृता या गुडुची के नाम से भी जाना जाता है. इसका स्वाद कड़वा होता है, लेकिन इसके औषधीय गुण अत्यंत प्रभावशाली हैं.

इसमें जीवाणुरोधी और विषाणुरोधी गुण
आयुर्वेद चिकित्साक डॉ. बालेंद्र शेखर पटेल ने लोकल 18 को बताया गिलोय को आयुर्वेद में त्रिदोष शामक माना गया है. यह विशेष रूप से पित्त और कफ दोष को संतुलित करने में प्रभावी है. गिलोय में जीवाणुरोधी और विषाणुरोधी गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को संक्रमणों से लड़ने की शक्ति देते हैं. इसके नियमित सेवन से सर्दी-खांसी, बुखार और अन्य सामान्य बीमारियों की आवृत्ति और तीव्रता कम होती है.

बुखार में रामबाण!
डॉ. पटेल के अनुसार, गिलोय डेंगू, मलेरिया, स्वाइन फ्लू और टाइफाइड जैसे बुखार में भी लाभकारी मानी जाती है. इसकी शीतलन प्रकृति शरीर का तापमान नियंत्रित करती है, विषैले तत्वों को बाहर निकालती है और बुखार के बाद आने वाली कमजोरी को दूर करने में मदद करती है. बुखार की स्थिति में अक्सर इसे तुलसी के साथ प्रयोग किया जाता है.

गिलोय ऐसे करती है काम
गिलोय लिवर के कार्य को बेहतर बनाकर शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में सहायक है. इसमें एंटी-डायबिटिक गुण भी पाए जाते हैं, जो ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करते हैं. इसके अलावा गठिया और जोड़ों के दर्द में भी यह राहत देती है, क्योंकि यह वात दोष को शांत करती है. त्वचा रोगों में भी गिलोय प्रभावी मानी जाती है. साथ ही यह तनाव हार्मोन को नियंत्रित कर मानसिक स्पष्टता बढ़ाने, थकान कम करने और चिंता के लक्षणों को दूर करने में सहायक औषधि है.