कम जमीन में अधिक मुनाफा:दो बीघा से 3 लाख रु कमाने के लिए लगाएँ यह औषधीय फसल

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यहाँ रोज़ैल की खेती की बात की जा रही है, जो एक औषधीय फसल है। इससे कई तरह के हर्बल प्रोडक्ट और मेडिसिन तैयार किए जाते हैं। इसकी सूखी पत्तियाँ और सूखे फूल दोनों ही बिकते हैं। इसके फूल लाल रंग के होते हैं।उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में इसकी खेती की जा रही है। मध्य प्रदेश के किसान भी इसे उगा रहे हैं। कम पानी तथा हल्की काली मिट्टी वाले क्षेत्रों में इसकी खेती और भी अच्छी होती है। इसके फूल, पत्ता और बीज सभी बेचे जाते हैं। आइये अब जानते हैं कि एक बीघा में खेती करने में कितना खर्च आता है।

रोज़ैल की खेती के लिए कितना बीज चाहिए?
एक बीघा में रोज़ैल की खेती के लिए लगभग 7 किलो बीज की आवश्यकता पड़ती है। यह फसल लगभग 5 महीने में तैयार हो जाती है। खाद की बात करें तो 25 किलो प्रति बीघा यूरिया का उपयोग किया जा सकता है। खरपतवार नियंत्रण के लिए बीच-बीच में निराई-गुड़ाई जरूरी है।

इसमें दवाइयों का खर्च लगभग नहीं के बराबर आता, क्योंकि इस फसल में रोग लगने की संभावना बहुत कम होती है। आप चाहें तो जैविक तरीके से भी इसकी खेती कर सकते हैं। आइये अब जानते हैं उत्पादन और कीमत के बारे में।

रोज़ैल की खेती से कितना उत्पादन मिलता है?
एक बीघा में रोज़ेल लगाने पर लगभग, 3 क्विंटल सूखे फूल, और 4 क्विंटल बीज प्राप्त होता है।

रोज़ैल के फूल और बीज की कीमत
वर्तमान समय में रोज़ैल के सूखे फूलों की कीमत लगभग ₹25,000 प्रति क्विंटल है, और इसके बीज की कीमत लगभग ₹8,000 प्रति क्विंटल मिल रही है। हालाँकि, इसकी कीमत इससे अधिक भी हो सकती है।

सूखे फूलों की कीमत ₹20,000 से ₹70,000 प्रति क्विंटल तक पहुँच सकती है। वहीं बीज की कीमत ₹30,000 से ₹1,00,000 प्रति क्विंटल तक जा सकती है। कीमतें बाजार की स्थिति, आवक, गुणवत्ता और माँग पर निर्भर करती हैं। इसी हिसाब से कमाई कम या अधिक हो सकती है।