*बीज विधेयक 2025 को लेकर बीज उद्योग में गहरा असंतोष, बीज कंपनियों पर ताला लगाने की तैयारी*

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3 साल कठोर कारावास, 30 लाख जुर्माना के प्रावधान से घबराट

कड़े कानून के कारण बीज महंगा,रिश्वतखोरी बढ़ेगी और अधिकारी कंपनियों को परेशान करेंगे

बीज उत्पादन की स्वतंत्रता समाप्त होगी

हर बीज फसल की अंकुरण क्षमता मौसम के अनुसार बदलती है। परंतु यह कानून माफ नहीं करता,घटिया बीज की शिकायत का प्रतिशत न्यूनतम परंतु कानून कठोर बनाया जा रहा है

बीज कंपनियां अपना बोरी बिस्तर बांधने को तैयार

केंद्र सरकार आने वाले समय में बीज अधिनियम 2025 लोकसभा में लाने वाली है। नए बीज कानून में कई ऐसे प्रावधान किए गए हैं, जिससे नकली और घटिया बीच बेचने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने के प्रावधान रखे गए हैं।

बीज उद्योग ने प्रावधानों को लेकर कई आशकांए

 जताई है। उद्योगों का कहना है कि, कई भी बीज नकली नहीं होता है परंतु नकली दर्जा देकर बीज उद्योग को बदनाम किया जाता है।

नकली बीज और घटिया बीज के शब्दों से बीच उद्योग में हमेशा घबराहट रहती है। बीज कभी भी नकली नहीं होता। खाद्य पदार्थ में मिलावट करके उसको नकली बनाया जा सकता है, इसी प्रकार स्वास्थ्य की औषधियां में भी मिलावट करके उसको नकली या घटिया बनाया जा सकता है, परंतु किसी भी फसल के बीज को किसी भी

प्रकार से नकली नहीं बनाया जा सकता है। ना ही उसको घटिया किया जा सकता है। परंतु देश में किसानों के मुख्य मुद्दे को और समस्याओं को दर किनार करते हुए, उसका समाधान न करते हुए केवल और केवल घटिया और नकली बीज के ऊपर राजनीति करने के कारण यह उद्योग अब संकट के दौर से गुजरने वाला है।

कई राज्यों के बीज संगठन इस प्रावधान को लेकर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है, क्योंकि अब नए बीज कानून के लागू होने पर 30 लाख रुपए तक का जुमानां और 3 साल तक की कठोर कारावास प्रस्तावित किए गए हैं। इसको लेकर उद्योग ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है।

बताया जाता है कि सोह बिल 2025 किसानों के हितों की रक्षा करने और कृषि क्षेत्र में ऊच दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है परंतु इस सीड बिल में पंजीकरण की पद्धति को और जटिल कर दिया गया है जिससे बीज की आपूर्ति कमजोर होती प्रतीत हो रही है।

बीज उद्योगों पर यदि कठोरता की जाएगी तो यह बीज उद्योग संकट से गुजरेगा जिसका परिणाम किसानों को भोगना पड़ेगा बीज की कमी किल्लत पूरे देश में निर्मित हो जाएगी।

कई किसान संगठन ने बताया कि कड़े कानून के कारण बीज उत्पादक कंपनियां अपना हाथ खींचेगी जिससे देश भर में बीज की कमी उत्पन्न होगी और बीच महंगा बिकेगा।

राजनीतिक गलियारों से भी यह खबर आ रही है कि कुछ संगठित उद्योगपति और मंत्री इस प्रकार का कानून बनना चाहते हैं जिससे कि बीज उद्योग पर एक छत्र राज उनका हो सके और छोटे बीज कंपनी उद्योग समाप्त हो जाए।

मध्य प्रदेश में 2000 से अधिक बीच उत्पादक सरकारी समिति है जो विशुद्ध रूप से किसान लोगो की बनाई हुई समिति है। जहां पर किसान स्वयं आपस में मिलकर बीज उत्पादन करते हैं और विक्रय करते हैं। ऐसे में कठोर दंड का प्रावधान के कारण कोई भी उत्पादक संगठन इस उद्योग से अपनी दूरी बनाएगा।

बीज उद्योग के उद्योगपतियों का कहना है कि मिलावटी कफ सिरप से लोगों की मौत हो जाती है परंतु उसे पर कोई कानून नहीं है। जबकि हेल्थ मेडिसिन यह सीधे रूप से मानव जीवन को समाप्त करती है। इसी प्रकार दूध, घी, मसाले तेल में जो मिलावट हो रही है उस पर कोई कड़े कानून नहीं है। जबकि पूरे भारत में कियान कॉल सेंटर में नकली खाद बीज के लिए कोई बहुत बड़ी संख्या में शिकायत दर्ज नहीं हुई है। राजनीति कर रही है।

नए बीज विधेयक फिर भी राजनीति पार्टी इस पर का ड्राफ्ट जारी

किसान की मूल समस्या उनकी उपज के दाम समर्थन मूल्य पर बिकना चाहिए वह मुख्य रूप से होती है। करोड़ों किसान की फसल समर्थन मूल्य पर विक्रय नहीं की जाती है, इसकी शिकायत है परंतु केंद्र सरकार के कृषि मंत्री केवल और केवल नकली बीज पर काला कानून लाकर किसान की मूल समस्या और मुख्य मुद्दों से किसानों को भटका रहे हैं।

“कुछ मल्टीनेशनल विदेशी कंपनी जो मक्का बीज जवार बीज गेहूं एवं सब्जियां का बीज उत्पादन करते हैं उनके साथ मिलकर यह नया प्रावधान लाया जा रहा है। पायनियर सीड का मक्का ₹1200 किलो तक का बाजार में मिलता है। बड़ी-बड़ी विदेशी कंपनियों के हाइब्रिड सीड 2000 से लेकर ₹10000 किलो तक के भाव से बिकते हैं। यह बीज कानून बड़ी कंपनियों के संरक्षण में देखरेख में और उनके अनुसार बनाया जा रहा है, ऐसा किसान नेताओं का कहना है।”

यदि बोज उद्योगों को सरलता प्रदान नहीं की गई तो बीज संकट खाद के संकट के सामान देश भर में होगा? जहां लाइन लगाकर खाद लेनी पड़ रही है ऐसे में बीज कंपनियां कम हो जाएंगी तो बीज लेने के लिए भी किसानों को लाइन लगाना पड़ेगी। जैसा की Bt कॉटन बीज में होरहा है

केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में गुणवत्ता सुधारने और किसानों को खराब बीजों से होने वाले नुकसान को रोकने के उद्देश्य से सीड्स बिल, 2025 का मसौदा जारी किया है। इस नए बिल के तहत निम्न गुणवत्ता, नकली या गैर-पंजीकृत बीज बेचने पर भारी जुर्माना और सज़ा का प्रावधान किया गया है।

बीज विधेयक, 2025 का मसौदा

  • केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने कृषि एवं नियामक मौजूदा आवश्यकताओं के अनुरूप बीज विधेयक, 2025 का मसौदा तैयार किया है। 
  • प्रस्तावित विधेयक मौजूदा बीज अधिनियम, 1966 और बीज (नियंत्रण) आदेश, 1983 का स्थान लेगा।
  • विधेयक का उद्देश्य
  • बीजों की गुणवत्ता को सुनिश्चित करना
  • किसानों को बेहतर बीज उपलब्ध कराना
  • नकली बीजों की आपूर्ति पर रोक लगाना
  • बीज उत्पादन और वितरण प्रणाली को व्यवस्थित करना
  • भारत में बीज उद्योग को अधिक पारदर्शी बनाना
  • प्रमुख प्रावधान

अनिवार्य पंजीकरण

  • नए बिल का प्रमुख प्रावधान बीजों का अनिवार्य पंजीकरण (Mandatory Registration) है।
  • बिल के अनुसार, अधिनियम लागू होने के बाद किसी भी बीज को बेचने से पहले उसका पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
  • केवल किसान किस्में (Farmer’s Variety) और निर्यात हेतु तैयार बीज इस अनिवार्यता से मुक्त रहेंगे।
  • पुराने बीज अधिनियम, 1966 के तहत पहले से अधिसूचित बीज किस्मों को स्वतः ही नई व्यवस्था में पंजीकृत माना जाएगा।
  • मौजूदा कानून में बीजों के लिए अनिवार्य पंजीकरण की व्यवस्था नहीं थी, जो अब पहली बार लागू की जाएगी।
  • अपराधों की तीन श्रेणियाँ
  • सीड्स बिल 2025 में अपराधों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
  • तुच्छ (Trivial)
  • लघु (Minor)
  • गंभीर (Major)
  • सबसे कड़े प्रावधान गंभीर अपराधों के लिए हैं।
  • गंभीर श्रेणी में शामिल प्रमुख अपराध:
  • नकली/स्प्यूरियस बीज की आपूर्ति
  • गैर-पंजीकृत बीज बेचना
  • बिना पंजीकरण के बीज विक्रेता, वितरक, उत्पादक या नर्सरी के रूप में व्यवसाय करना
  • इन कार्यों को रोकने के लिए सख्त दंड का प्रावधान किया गया है।
  • जुर्माना और सज़ा
  • गंभीर श्रेणी के अपराधों के लिए:
    • अधिकतम 30 लाख रुपये तक का जुर्माना
    • अधिकतम 3 साल तक की कैद
  • यह पहली बार है जब बीज गुणवत्ता को लेकर इतने कठोर दंड प्रस्तावित किए गए हैं।
  • नए कानून की आवश्यकता क्यों
  • वर्तमान में बीजों की बिक्री और उनकी गुणवत्ता को नियंत्रित करने के लिए बीज अधिनियम, 1966 लागू है। 
  • लेकिन बदलते कृषि मॉडल, बाजार में बढ़ते बीज व्यापार और बार-बार सामने आने वाली नकली बीजों की समस्या के कारण सरकार नए और सख्त कानून की आवश्यकता महसूस कर रही थी। 
  • सीड्स बिल 2025 इसी उद्देश्य से मौजूदा कानून की जगह लेने जा रहा है।

सीड्स बिल 2025 किसानों के हितों की रक्षा करने और कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अनिवार्य पंजीकरण, कड़े दंड और बीज आपूर्ति व्यवस्था पर नियंत्रण से नकली और कम गुणवत्ता वाले बीजों की समस्या को काफी हद तक रोकने की उम्मीद है। आने वाले समय में इस बिल के लागू होने से किसानों को अधिक भरोसेमंद और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध हो सकेंगे।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की तरफ से जारी ड्राफ्ट में क्वालिटी से संबंधित कई प्रावधान किए गए हैं। इसके अलावा ड्राफ्ट में यह भी बताया गया है कि सरकार, किसानों, बीज कंपनियों और वितरकों के लिए क्या प्रावधान होंगे। नियम का उल्लंघन करने पर कितना जुर्माना लगेगा, इसके बारे में भी जानकारी दी गई है।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने बीज विधेयक 2025 का ड्राफ्ट जारी किया है। प्रस्तावित विधेयक मौजूदा बीज अधिनियम, 1966 और बीज (नियंत्रण) आदेश, 1983 का स्थान लेगा। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की तरफ से जारी ड्राफ्ट में बाजार में उपलब्ध बीजों और रोपण सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, किसानों को किफायती दरों पर अच्छे बीज उपलब्ध कराने, नकली और घटिया बीजों की बिक्री पर अंकुश लगाने, नवाचार को बढ़ावा देने, बीज की वैश्विक किस्मों को किसानों तक पहुंचाने के लिए बीज आयात को उदार बनाने और बीज आपूर्ति श्रृंखलाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने का प्रस्ताव है।

ड्राफ्ट बिल में छोटे श्रेणी के अपराधों को अपराधमुक्त किया जाना प्रस्तावित है, जिससे व्यापार सुगमता को बढ़ावा मिले और अनुपालन का बोझ कम हो। हालांकि इसके साथ ही अपराध के गंभीर उल्लंघन पर दंड के कड़े प्रावधान रखे गए हैं। सभी हितधारकों से ड्राफ्ट के प्रावधानों पर 11 दिसंबर 2025 तक सुझाव मांगे गए हैं।ड्राफ्ट में अपराध के अनुसार दंड को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में रखा गया है- माइनर, मॉडरेट और मेजर। पहली बार (माइनर) अपराध करने पर व्यक्ति को लिखित नोटिस दिया जाएगा। तीन साल के भीतर दोबारा दोबारा अपराध करने पर 50,000 रुपये जुर्माना लगेगा। मॉडरेट श्रेणी में पहली बार अपराध करने वाले पर एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। तीन साल के भीतर दोबारा अपराध करने पर व्यक्ति पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

मेजर यानी बड़े अपराध करने पर पहली बार 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। पांच साल के भीतर दोबारा अपराध करने पर जुर्माने की रकम बढ़ कर 20 लाख रुपये हो जाएगी। उसके पांच साल के भीतर अगर तीसरी बार अपराध पकड़ा गया तो उस पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगेगा और डीलर रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है। जुर्माने के साथ/अथवा तीन साल तक कैद की सजा का भी प्रावधान किया गया है।

ड्राफ्ट में अपराध के अनुसार दंड को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में रखा गया है- माइनर, मॉडरेट और मेजर। पहली बार (माइनर) अपराध करने पर व्यक्ति को लिखित नोटिस दिया जाएगा। तीन साल के भीतर दोबारा दोबारा अपराध करने पर 50,000 रुपये जुर्माना लगेगा। मॉडरेट श्रेणी में पहली बार अपराध करने वाले पर एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। तीन साल के भीतर दोबारा अपराध करने पर व्यक्ति पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

मेजर यानी बड़े अपराध करने पर पहली बार 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। पांच साल के भीतर दोबारा अपराध करने पर जुर्माने की रकम बढ़ कर 20 लाख रुपये हो जाएगी। उसके पांच साल के भीतर अगर तीसरी बार अपराध पकड़ा गया तो उस पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगेगा और डीलर रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है। जुर्माने के साथ/अथवा तीन साल तक कैद की सजा का भी प्रावधान किया गया है।

बीज विधेयक 2025 ड्राफ्ट के मुख्य प्रावधान

क्वालिटी संबंधी प्रावधान

-सभी प्रकार के बीजों का पंजीकरण बिक्री से पहले अनिवार्य है।
-बीज उत्पादकों को बाजार में बिकने वाले बीजों की गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित करनी होगी।
-मानदंडों के पालन के लिए अधिकृत एजेंसियों द्वारा बीज सर्जिफिकेशन उपलब्ध कराए जाएंगे।
-बीजों की उचित लेबलिंग अनिवार्य है। इसमें वैरायटी, स्रोत, गुणवत्ता और अंकुरण दर बताना होगा।
-गलत विवरण या निम्न गुणवत्ता वाले बीजों की बिक्री पर कानूनी कार्रवाई एवं दंड का प्रविधान है।
-बीज परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी जो गुणवत्ता की जांच और विवाद निपटारे में सहायता करेंगी।
-बीजों का आयात निर्धारित नियमों के अनुसार ही हो सकेगा, ताकि खराब क्वालिटी के बीज न आ सकें।

किसानों के लिए क्या

-किसानों (farmer rights) को अपनी फसल से बीज रखने और उनका इस्तेमाल करने की छूट होगी। उन्हें इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराने की आवश्यकता नहीं होगी।
-अगर बीज बताए गए विवरण के अनुसार प्रदर्शन नहीं करते तो किसानों को मुआवजा पाने का अधिकार होगा।

सरकार के लिए प्रावधान

-केंद्र सरकार के पास सार्वजनिक हित में कुछ बीजों को नियंत्रित या प्रतिबंधित करने का अधिकार प्राप्त होगा।
-नीतिगत और नियामकीय मामलों में सलाह देने के लिए राष्ट्रीय बीज समिति का गठन किया जाएगा।
-बीज निरीक्षकों को संदेहास्पद बीजों की जांच, नमूने लेने और जब्त करने का अधिकार होगा।
-नई बीज वैरायटी के लिए बौद्धिक संपदा सुरक्षा की गारंटी होगी।

बीज कंपनियों, विक्रेताओं के लिए क्या

-बीज कंपनियों के लिए पारदर्शी रिकॉर्ड रखना और नियमित ऑडिट अनिवार्य होगा।
-बीज वितरकों और विक्रेताओं के लिए लाइसेंसिंग अनिवार्य होगी, बिना लाइसेंस के व्यापार वर्जित होगा।
-बीज विक्रेताओं के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों में स्टॉक की रिपोर्टिंग और दिशानिर्देशों का पालन शामिल है।

दंड से संबंधित प्रावधान

-नियमों के उल्लंघन पर दंड का प्रावधान (compliance penalties) है, बार-बार अपराध करने पर दंड में वृद्धि होगी।
-नए जीएम बीजों को लाने में पर्यावरण और जैव सुरक्षा मानकों का पालन आवश्यक होगा।
-किसानों के जुड़े बीज विवादों के लिए शीघ्र शिकायत समाधान की व्यवस्था होगी।
-बीजों के विज्ञापन और विपणन के लिए नियम बनेंगे; झूठे दावे करने वाले अथवा भ्रामक विज्ञापन प्रतिबंधित रहेंगे।