आखिर भावांतर योजना में क्या फंसा पेच, खाद मांगने पर मिल रही लाठी

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भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा में शीतकालीन सत्र के पहले दिन नियम 139 के अंतर्गत अतिवृष्टि से प्रदेश में किसानों के हुए नुकसान पर चर्चा की गई. इस दौरान कांग्रेस विधायकों ने फसल बीमा, खाद, मुआवजा और भावांतर सहित अन्य किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरा. इस बीच जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भावातंर योजना को मध्य प्रदेश में फिर से शुरू कर वाहवाही लूट रहे हैं. किसानों को फसल का उचित भाव दिए जाने के दावे किए जा रहे हैं. वहीं इस योजना की शुरुआत किस सरकार ने की, इसको लेकर विधानसभा में दोनों ही मुख्य राजनीतिक पार्टियों के बीच रार देखने को मिली.

कैलाश विजयवर्गीय ने भावांतर को बताया कांग्रेस की देन

नगरीय प्रशासन और संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भावांतर पर बोलते हुए कहा कि “यह कांग्रेस की योजना थी, लेकिन कांग्रेस के समय किसानों को एक पैसा नहीं मिला, बल्कि बिचौलिओं ने फसल बेचकर पैसा अपने पास रख लिया. विजयवर्गीय ने कहा कि भाजपा की सरकार में इस बार किसानों ने 10 लाख टन खाद्यान्न बेचा है. प्रदेश के 2.67 लाख किसानों को 482 करो़ड़ रुपए का भुगतान किया गया है. उन्होंने कहा कि किसानों को फसल बीमा के साथ क्षतिपूर्ति का लाभ मिल रहा है.”

भावांतर योजना को लेकर बच्चन ने लगाया सवाल

पूर्व गृहमंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक बाला बच्चन ने नियम 139 के अंतर्गत अतिवृष्टि से प्रदेश में किसानों के हुए नुकसान पर चर्चा के दौरान कहा कि “धार में किसान सोयाबीन और कपास समेत अन्य फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार को कोई असर नहीं हो रहा है. बाला बच्चन ने कहा कि मैंने विधानसभा में भावांतर को लेकर तारांकित प्रश्न लगाया था, जिसमें जबाव मिला है कि भावांतर योजना की शुरुआत साल 2017-18 में की गई थी. उस समय भाजपा की सरकार थी.”

3100 रुपए की जगह 2000-2200 में बिक रही धान

कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने अतिवृष्टि से प्रदेश में किसानों के हुए नुकसान पर चर्चा कहा कि “विधानसभा से पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी, कि यदि भाजपा की सरकार बनती है, तो धान का न्यूनतम समर्थन मूलय 3100 रुपए प्रति क्विंटल किया जाएगा, लेकिन सरकार बनने के दो साल बाद भी धान की 2000-2200 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदी हो रही है. मक्का को लेकर आदिवासी जिलों में काफी नुकसान हुआ.

मक्का का साल 2025-26 के लिए समर्थन मूल्य 2400 रुपए घोषित किया गया है, लेकिन मंडियों में 1000-1200 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है. एक पत्र के जवाब में बताया कि केंद्र सरकार ने कहा था कि राज्य सरकार ने मक्का की खरीदी के लिए पत्र नहीं लिखा. इसलिए इसकी खरीदी मध्य प्रदेश में 2400 रुपए प्रति क्विंटल नहीं हो सकती.”

खाद मांगने पर मिल रही लाठी

अतिवृष्टि पर चर्चा के दौरान सदन में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि “किसानों के मुद्दे पर चर्चा चल रही है, लेकिन कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री सदन से गायब हैं. ये बताता है कि किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार कितनी गंभीर है. लैंड पुलिंग एक्ट पर सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए़. बीमा कंपनियां हजारों करोड़ रुपए कमा रही हैं, किसान को 1 हजार मिल रहें, शर्म की बात है. सिंघार ने कहा कि जानबूझकर नुकसान का सर्वे समय पर नहीं किया जाता है. भावांतर योजना के तहत बिचौलियों के माध्यम से फसल खरीदी जा रही है, किसानों को नुकसान हो रहा है. खाद मांगने पर किसानों को पुलिस की लाठी मिल रही है, लाइनों में मौत हो रही है.”