सागर: नरवाई जलाने को लेकर जिला प्रशासन ने सख्ती अपनाना शुरू कर दिया है. पिछले 2 दिनों में जिला कलेक्टर के निर्देश पर अब तक 3 किसानों पर एफआईआर दर्ज हुई है. कलेक्टर संदीप जी आर के निर्देश पर जिले में पराली नरवाई जलाने के मामले में केसली और रहली में अलग-अलग किसानों के खिलाफ नरवाई (फसल अवशेष) जलाने पर एफआईआर दर्ज कराई है.
2 दिन में 3 किसानों पर एफआईआर
सरकार और प्रशासन के स्तर पर किसानों को जागरूक करने के बाद भी नरवाई जलाने के मामले रुक नहीं रहे हैं. ऐसी स्थिति में जिला कलेक्टर संदीप जी आर ने सख्ती बरतना शुरू कर दिया. 2 दिनों में उनके निर्देशों पर 3 किसानों पर एफआईआर दर्ज की गई है. तहसीलदार केसली के आदेश पर थाना गौरझामर में नयानगर निवासी राकेश कुमार जैन द्वारा 2 हेक्टेयर जमीन पर मक्का की फसल कटाई के बाद फसल अवशेषों को जलाया गया. जिससे पर्यावरण प्रदूषण और आगजनी की संभावना को देखते हुए कार्रवाई की गई और थाना गौरझामर में आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है.
बिना अनुमति खेत में लगाई आग, मामला दर्ज
इसी तरह जनकपुर के किसान भरत लोधी और आशीष पिता शिवराज लोधी द्वारा अपनी 2.59 हेक्टेयर भूमि पर पराली जलाने का मामला सामने आया. जांच में पाया गया कि दोनों किसानों ने बिना अनुमति खेत में आग लगाई. जिससे जनहानि, धनहानि एवं पर्यावरणीय क्षति की संभावना बनी. इसलिए इनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया.
आदेश का उल्लंघन किसान को पड़ा भारी
इसके साथ ही रहली तहसील क्षेत्र में बलराम अहिरवार की रिपोर्ट पर ग्राम ढिकुआ निवासी जयराम कुर्मी के खिलाफ भी मामला दर्ज हुआ. आरोपी ने अपने 1.49 हेक्टेयर के खेत में पराली जलाकर शासन के प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन किया था. 3 मामलों में अपराध पंजीबद्ध कर जांच प्रारंभ कर दी गई है.
नियम पालन नहीं करने पर होगी कार्रवाई
कलेक्टर संदीप जी आर ने साफ निर्देश दिए हैं कि जिले में पराली जलाने की किसी भी घटना को गंभीरता से लिया जाएगा. उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे खेतों की सफाई के लिए वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल विधियों का उपयोग करें अन्यथा उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी. किसान नरवाई या पराली न जलाएं और फसल अवशेष प्रबंधन के लिए शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए संसाधनों का उपयोग करें. शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रदेश में धान, गेहूं एवं अन्य फसलों के अवशेषों को खेतों में जलाना प्रतिबंधित किया गया है.
पराली जलाने में देश भर में टॉप पर रहा श्योपुर

किसान ख़रीफ़ के सीजन में धान की खेती के लिए मेहनत करता है. तीन महीने में जब फसल पक जाती है तो हार्वेस्टिंग के बाद अगली फसल की तैयारी करता है. लेकिन इस बीच अपने खेत से निकली धान की पराली को जल्दी साफ़ करने के लिए उसमें आग लगा देता है. इससे ना सिर्फ प्रदूषण बढ़ता है बल्कि तेज़ी से फैलती आग और किसानों का भी नुकसान कर देती है. पराली जलाने की ये आदत देश में सबसे ज़्यादा पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश के किसानों में देखी गई है. 2024 में तो देश भर में मध्य प्रदेश का श्योपुर पराली जलाने में टॉप पर था. इसी हालात को सुधारने के लिए अब श्योपुर में आसमान के साथ साथ ज़मीन पर भी निगरानी रखी जाएगी.
पराली जलाने वाले टॉप 10 में एमपी के 6 शहर
साल 2024 में पराली (धान की फसल हार्वेस्टिंग के बाद बचा हुआ कचरा या भूसा) और नरवाई जलाने में मध्य प्रदेश बदनाम रहा. सबसे ज़्यादा पराली जलाने की वजह से लगी आग की घटनाओं में मध्य प्रदेश के 6 शहर देश की टॉप टेन सूची में शामिल थे और इनमें भी श्योपुर पहले पायदान पर था. ये वो सूची थी जिसे भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के (कंसोर्टियम फॉर रिसर्च ऑन एग्रोएकोसिस्टम मॉनिटरिंग एंड मॉडलिंग फ्रॉम स्पेस (सीआरआईएएमएस) के बुलेटिन के आधार पर तैयार किया गया था.

सैटेलाइट के साथ जमीन पर पराली प्रोटेक्शन फोर्स
इन हालातों को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार के निर्देश पर श्योपुर में पराली जलाने वालों पर सख्ती करने की तैयारी कर ली गई है. इसको रोकने के लिए अब भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के सेटेलाइट के साथ साथ जमीनी स्तर पर पराली प्रोटेक्शन फोर्स भी मॉनिटरिंग करेगी. श्योपुर में इस सीजन की धान की फसल करीब एक लाख हेक्टेयर में पक कर तैयार खड़ी है. ऐसे प्रश्न का अंदाजा है कि 15 अक्टूबर के बाद जब धान की कटाई शुरू होगी तो कई किसान पराली जलाने की कोशिश करेंगे.

मध्य प्रदेश में पराली की समस्या गंभीर
श्योपुर के 388 गांव किए चिह्नित
पराली जलाने और प्रदूषण के मामले में मध्य प्रदेश फिर पहले पायदान पर ना आए इसके लिए स्थानीय प्रशासन ने पराली प्रोटेक्शन फोर्स बनाने का फैसला लिया है. ये फोर्स फ़्लाइंग स्क्वाड की तरह रात के समय खेतों की निगरानी और गस्त करेगी और किसानों को पराली जलाने से रोकेगी. इसके लिए हाल ही में जिले के 388 गांव चिह्नित कर 118 अधिकारियों की ड्यूटी लगा दी गई है. जिसमें प्रशासन, पुलिस से लेकर कृषि अधिकारी तक शामिल हैं.

पराली जलाने की 2504 मामलों के साथ देश में टॉप पर था श्योपुर
पराली के सीजन को देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, आईएआरआई के उपग्रह से निगरानी की जा रही है. स्टेलाइट रिमोट सेंसिंग को सक्रिय कर दिया गया है. जो तुरंत इसका अलर्ट भी सरकार के फॉरेस्ट फायर सिस्टम को देता है. जिससे इससे जुड़े लोगों को आग की जानकारी लग जाती है इसके साथ ही सेटलाइट आसमान से ही पराली की वजह से लगी खेतों में आग के आंकड़ों को दर्ज करता है. इससे किसके खेत में आग लगी इसकी भी जानकारी पता चलती है. पिछले साल भी इस सेटेलाइट सिस्टम के बुलेटिन से पता चला कि श्योपुर में देश में पराली जलाने से आग की सबसे ज़्यादा 2504 घटनाएं सामने आई थीं.
पराली को लेकर मध्य प्रदेश में सख्त है सरकार
ऐसा नहीं है कि सरकार इस तरह के मामलों को रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठा रही है. मध्य प्रदेश में तो पराली जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है. फिर भी इसका उल्लंघन कर अगर कोई किसान गुपचुप तरीके भी पराली या नरवाई जलाता है तो उसके ऊपर FIR का प्रावधान है. साथ ही उस पर 2500 से 30 हज़ार रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है. वहीं सरकार की ओर से भी सख्त निर्देश है कि ऐसे किसानों को मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के लाभ से वंचित कर दिया जाएगा.

पराली से बन रहा पेपर, हो रही कमाई
पराली से पेपर बनाकर कर रहे कमाई
इन हालातों को बदलने के लिए जहाँ श्योपुर में पराली प्रोटेक्शन फ़ोर्स बनाया गया है, वहीं प्रशासन भी किसानों को जागरूक करने में लगा है. क्योंकि पराली जलाने से होने वाले नुकसान के उलट यह पराली किसानों की कमाई का जरिया बन सकती है. धान की पराली से कागज और बोर्ड बनाया जा सकता है. मुरैना में इसकी एक यूनिट भी लगी हुई है. crast नाम का स्टार्टअप चला रहे शुभम यादव पराली से कागज और बोर्ड बना रहे हैं. इस पराली के कागज की मदद से वे कई पेपर प्रोडक्ट भी तैयार करते हैं. इस तरह से वे ट्री फ्री पेपर उपलब्ध करा रहे हैं. यह पराली मैनेजमेंट का एक अच्छा उदाहरण है.

पराली जलाने से हैं कई नुकसान
200 रुपये क्विंटल में खरीदने को तैयार व्यापारी
पेपर के अलावा पराली से बायोफ़्यूल भी बन सकता है. जिसके लिए श्योपुर में ही आधा दर्जन बायोफ्यूल बनाने की यूनिट लगी हुई हैं. ऐसी ही एक यूनिट का संचालन कर रहे व्यवसायी जीत मंगल का कहना है, “श्योपुर के जो भी किसान पराली बेलर या बिना बेलर के लाना चाहते हैं तो वे उसे खरीदेंगे. जिसके लिए वे किसानों को 200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान भी करेंगे. इस तरह खेतों में पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम तो होगी ही साथ ही किसानों को एक आय का और साधन भी मिलेगा. वे धान के बाद उसकी बची हुई पराली भी बेच कर कमाई कर सकेंगे.”

पराली को लेकर बैठक करते कलेक्टर
किसान हो रहे जागरूक
श्योपुर के किसान भी इस तरह की पहल से जागरूक हो रहे हैं. जिला प्रशासन के प्रयासों के चलते किसानों की सोच में भी बदलाव आ रहा है. श्योपुर के ही ज्ञानपुरा गांव के किसान कश्मीर सिंह ने बताया कि वे अपने खेतों में निकलने वाली धान की पराली और गेंहू की नरवाई पिछले तीन सालों से नहीं जला रहे हैं. फसल के बाद नरवाई और पराली चरवाहे चारे के लिए ले जाते हैं. इससे उनका खेत भी साफ़ हो जाता है और अगली फसल भी अच्छे से उगा पाते हैं. पराली जलाने की वजह से कई बार दूसरे खेतों में तैयार फसल जल जाती है. अब तक श्योपुर में पराली के लिए बंडल बनाने वाली मशीनें भी आ चुकी हैं. जिनसे एक एक्टेयर में बंडल बनाने में सिर्फ 7 हज़ार का खर्च आता है. और जब उतने बंडल बायोफ्यूल वालों को बेचो तो क़रीब 15 हज़ार रुपये तक मिल जाते हैं.
‘जागरूकता का प्रयास, उल्लंघन पर नहीं मिलेगी रियायत’
श्योपुर कलेक्टर अर्पित वर्मा का कहना है, “पराली प्रबंधन के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है. इसके लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है. साथ ही किसानों के साथ बैठक भी की गई है. किसान सुपर सीडर से लेकर अन्य प्रबंधन कर सकते हैं. पराली जलाने के मामलों में कोई रियायत नहीं दी जाएगी. हम पराली जलाने को लेकर निगरानी के लिए रेड, येलो और ग्रीन जोन का फार्मूला अपना रहे हैं. पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त प्लान तैयार कर रहे हैं. ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाएगी. सूचनाओं के लिए कंट्रोल रूम भी बनाया है.”




