धान, जो कि खरीफ मौसम की मुख्य फसल है, में इस वर्ष अब तक 176.68 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई हो चुकी है, जो कि पिछले वर्ष इसी अवधि में 157.21 लाख हेक्टेयर थी। यह 19.47 लाख हेक्टेयर की बढ़त दर्शाता है। पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में समय पर वर्षा और अनुकूल जलवायु के कारण धान की रोपाई और बुआई में तेजी देखी गई है।

कपास की बुआई में गिरावट, महाराष्ट्र और तेलंगाना में रुझान बदला
कपास की कुल बुआई इस वर्ष 98.55 लाख हेक्टेयर रही है, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 102.05 लाख हेक्टेयर था। इस प्रकार इस फसल में 3.49 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले वर्ष की मूल्य अस्थिरता और कुछ क्षेत्रों में देरी से हुई बारिश के चलते किसान अन्य फसलों जैसे दालें और मक्का की ओर शिफ्ट हुए हैं।
दालें: मूंग और मोठ में अच्छी वृद्धि, अरहर और उड़द में गिरावट
कुल दालों की बुआई इस वर्ष 81.98 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुकी है, जो पिछले वर्ष के 80.13 लाख हेक्टेयर की तुलना में 1.84 लाख हेक्टेयर अधिक है। हालांकि फसलवार विश्लेषण में मिश्रित रुझान देखने को मिले:
- मूंग (27.31 लाख हेक्टेयर) और मोठ (7.56 लाख हेक्टेयर) में क्रमशः 2.79 लाख हेक्टेयर और 2.61 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है।
- वहीं अरहर (-1.61 लाख हेक्टेयर) और उड़द (-2.06 लाख हेक्टेयर) में कमी आई है।
मोटे अनाज: मक्का और बाजरा ने दिखाई तेजी
मोटे अनाजों की बुआई 133.65 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुकी है, जो कि पिछले वर्ष के 117.66 लाख हेक्टेयर से 15.99 लाख हेक्टेयर अधिकहै।
मक्का (71.21 लाख हेक्टेयर) और बाजरा (48.94 लाख हेक्टेयर) में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई, जो कि क्रमशः 9.48 लाख हेक्टेयर और 6.85 लाख हेक्टेयर है।
यह वृद्धि मुख्य रूप से पशु चारे की मांग, बेहतर मूल्य और सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों में इन फसलों की अनुकूलता के कारण हुई है।
तेलहन फसलों में गिरावट, सोयाबीन सबसे ज्यादा प्रभावित
तेलहन फसलों की कुल बुआई इस वर्ष घटकर 156.76 लाख हेक्टेयर रह गई है, जो कि पिछले वर्ष 162.80 लाख हेक्टेयर थी। इसमें 6.04 लाख हेक्टेयर की कमी हुई है।
सोयाबीन में सबसे अधिक गिरावट (-7.29 लाख हेक्टेयर) देखी गई है, जो इस फसल में पिछले वर्ष के मुकाबले किसानों के कम रुझान को दर्शाता है।
हालांकि, कुछ फसलों जैसे मूंगफली (+0.86 लाख हेक्टेयर) और तिल (+0.46 लाख हेक्टेयर) में वृद्धि दर्ज की गई है।
गन्ना, जूट और मेस्ता में स्थिरता
गन्ने की बुआई 55.16 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुकी है, जो पिछले वर्ष के 54.88 लाख हेक्टेयर से थोड़ी अधिक है।
वहीं जूट और मेस्ता की बुआई में 0.12 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। जूट 5.33 लाख हेक्टेयर और मेस्ता 0.20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोया गया है।
कुल खरीफ क्षेत्र 708.31 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा
भारत में खरीफ सीजन की बुआई 708.31 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुकी है, जो पिछले वर्ष के 680.38 लाख हेक्टेयर से 27.93 लाख हेक्टेयर अधिक है। यह वृद्धि मौसमी परिस्थितियों में सुधार, सरकारी योजनाओं के बेहतर कार्यान्वयन और किसानों के रणनीतिक निर्णयों का परिणाम है।
पूरा क्षेत्रवार आंकड़ा देखें (लाख हेक्टेयर में):
| फसल | औसत सामान्य क्षेत्र | 2025 क्षेत्र | 2024 क्षेत्र | अंतर |
|---|---|---|---|---|
| धान | 403.09 | 176.68 | 157.21 | +19.47 |
| कुल दालें | 129.61 | 81.98 | 80.13 | +1.84 |
| – अरहर | 44.71 | 30.09 | 31.70 | -1.61 |
| – कुल्थी | 1.72 | 0.14 | 0.12 | +0.01 |
| – उड़द | 32.64 | 14.45 | 16.51 | -2.06 |
| – मूंग | 35.69 | 27.31 | 24.52 | +2.79 |
| – अन्य दालें | 5.15 | 2.43 | 2.33 | +0.10 |
| – मोठ | 9.70 | 7.56 | 4.95 | +2.61 |
| कुल मोटे अनाज | 180.71 | 133.65 | 117.66 | +15.99 |
| – ज्वार | 15.07 | 9.99 | 9.81 | +0.18 |
| – बाजरा | 70.69 | 48.94 | 42.09 | +6.85 |
| – रागी | 11.52 | 1.42 | 1.70 | -0.28 |
| – मक्का | 78.95 | 71.21 | 61.73 | +9.48 |
| – अन्य छोटे अनाज | 4.48 | 2.09 | 2.34 | -0.25 |
| कुल तिलहन | 194.63 | 156.76 | 162.80 | -6.04 |
| – मूंगफली | 45.10 | 38.01 | 37.16 | +0.86 |
| – तिल | 10.32 | 6.04 | 5.58 | +0.46 |
| – सूरजमुखी | 1.29 | 0.54 | 0.55 | -0.02 |
| – सोयाबीन | 127.19 | 111.67 | 118.96 | -7.29 |
| – रामतिल | 1.08 | 0.02 | 0.22 | -0.20 |
| – अरंडी | 9.65 | 0.43 | 0.28 | +0.15 |
| – अन्य तिलहन | – | 0.05 | 0.05 | 0.00 |
| गन्ना | 52.51 | 55.16 | 54.88 | +0.29 |
| जूट और मेस्ता | 6.60 | 5.53 | 5.65 | -0.12 |
| – जूट | 6.19 | 5.33 | 5.43 | -0.11 |
| – मेस्ता | 0.40 | 0.20 | 0.21 | -0.01 |
| कपास | 129.50 | 98.55 | 102.05 | -3.49 |
| कुल क्षेत्र | 1096.65 | 708.31 | 680.38 | +27.93 |
2. असम-राजस्थान के मंत्रियों से मुलाकात में बोले शिवराज- नकली खाद-बीज पर होगी कार्रवाई, कानून कड़ा बनाएंगे
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि भवन, नई दिल्ली में असम और राजस्थान के मंत्रियों के साथ अहम बैठक की। इस दौरान असम के कृषि, बागवानी, पशुपालन और पशु चिकित्सा मंत्री अतुल बोरा और राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने श्री चौहान से मुलाकात कर अपने-अपने राज्यों के कृषि विकास से जुड़ी अहम जानकारियां साझा कीं।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों और ग्रामीणों के समग्र विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों को जहां कहीं भी कोई परेशानी होगी, सरकार उनके साथ खड़ी रहेगी।
बाढ़ और सूखे की मार झेल रहे किसानों के लिए विशेष पहल
असम के मंत्री अतुल बोरा के साथ बैठक में श्री चौहान ने हाल ही में असम के कुछ जिलों में आई बाढ़ की स्थिति और उससे प्रभावित किसानों की स्थिति के बारे में जानकारी ली। श्री चौहान ने कहा कि वे जल्द ही असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे और किसानों की समस्या को नजदीक से देखेंगे और सुनेंगे। उन्होंने कहा कि कुछ इलाकों में बाढ़ तो कुछ में सूखे की मार झेलनी पड़ रही है, ऐसे में केंद्र और राज्य दोनों मिलकर किसानों को हरसंभव राहत देने का काम करेंगे।
असम के किसानों के लिए नई फसलों की वैरायटी अधिसूचित होग
असम के मंत्री ने बताया कि राज्य में कुछ फसलों की किस्में अधिसूचित नहीं हैं। इस पर केंद्रीय मंत्री ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) को निर्देश दिया कि वे असम की जलवायु के अनुसार राजमा, मसूर, अरहर, सूर्यमुखी, चारा मक्का, लहसुन और प्याज की उपयुक्त वैरायटी को अधिसूचित करें ताकि किसान नई फसलें आसानी से अपना सकें।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लेकर भी अहम फैसला लिया गया। श्री चौहान ने असम में डिजिटल फार्मर रजिस्ट्री की अनिवार्यता से राहत देने का निर्देश दिया ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इस योजना का लाभ ले सकें। साथ ही पूर्वोत्तर जैविक कृषि मूल्य श्रंखला विकास मिशन की अवधि भी असम के लिए एक साल और बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
राजस्थान में नकली खाद-बीज बेचने वालों पर कसेगा शिकंजा
राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने बैठक में नकली बीज, खाद और कीटनाशकों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपी। इस पर श्री शिवराज सिंह ने स्पष्ट किया कि नकली खाद-बीज बेचने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जल्द ही इस पर कानून को और कठोर बनाएगी। श्री चौहान ने बताया कि इस मुद्दे पर सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र भी भेजा गया है और निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी कीमत पर किसानों के साथ धोखा न हो।
किसानों से धोखा नहीं होने देंगे: शिवराज सिंह
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने दो टूक कहा कि सरकार किसानों से धोखा नहीं होने देगी। गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। इस बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी समेत मंत्रालय और दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
3. Sirio 4×4: दुनिया का सबसे छोटा 4WD ट्रैक्टर! सिर्फ 65 सेमी चौड़ा लेकिन ताकत में दमदार, जानिए खासियतें
अगर आप छोटे खेत, बाग-बगीचे या ग्रीनहाउस में खेती करते हैं और बार-बार सोचते हैं कि ट्रैक्टर नहीं चल पाएगा तो अब आपकी ये चिंता खत्म हो सकती है। बाजार में ऐसा ट्रैक्टर आ चुका है जो दिखने में जितना छोटा है, ताकत में उतना ही शक्तिशाली है।
खास बात यह है कि इसके छोटे साइज के बावजूद इसमें 13 KW का दमदार इंजन लगा है जो हर किस्म की खेती और बागवानी के काम को आसानी से संभाल लेता है। खेती हो या ग्रीनहाउस, अंगूर की बेलें हो या क्रिसमस ट्री प्लांटेशन, Sirio 4×4 हर जगह फिट बैठता है। आइए जानते हैं इस शानदार ट्रैक्टर की खासियतें जो इसे छोटे किसानों के लिए सबसे बढ़िया विकल्प बनाती हैं।
सिर्फ साइज में छोटा, ताकत में बड़ा
Sirio 4×4 में 13 KW का दमदार इंजन लगा है जो खेत की जुताई से लेकर ग्रीनहाउस, अंगूर की खेती, क्रिसमस ट्री प्लांटेशन और नर्सरी के काम को बेहद आसान बना देता है। इसकी ताकत और परफॉर्मेंस छोटे किसानों को महंगे और बड़े ट्रैक्टर पर निर्भर होने से मुक्त कर सकती है।.
4. भारत में कहां उगते हैं सबसे लजीज आम? नेशनल मैंगो डे पर जानिए टॉप 5 राज्यों की पूरी लिस्ट
आम का नाम सुनते ही मुंह में पानी आना लाजिमी है। स्वाद, खुशबू और मिठास से भरपूर यह फल सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में पसंद किया जाता है। हर साल 22 जुलाई को नेशनल मैंगो डे के रूप में मनाया जाता है, जो देश के इस राष्ट्रीय फल की विविधता और मिठास को सेलिब्रेट करता है।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है, जहां करीब 1500 से अधिक किस्में जैसे अल्फांसो, दशहरी, लंगड़ा, केसर और चौसा उगाई जाती हैं। इनका स्वाद, सुगंध और बनावट हर क्षेत्र में अलग-अलग है, जो भारत की मिट्टी और जलवायु की अनूठी देन है। नेशनल मैंगो डे के अवसर पर आइए जानते हैं उन टॉप 5 राज्यों के बारे में, जहां सबसे लजीज और विश्व प्रसिद्ध आम उगते हैं।
भारत में सबसे लजीज आम उगाने वाले टॉप 5 राज्य
1. उत्तर प्रदेश – उत्तर प्रदेश 2.5 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक वार्षिक उत्पादन के साथ स्पष्ट रूप से अग्रणी है। यहां आदर्श कृषि-जलवायु परिस्थितियां हैं और आम की खेती का लंबा इतिहास है। यहां उगाई जाने वाली प्रमुख किस्में दशहरी और लंगड़ा हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हैं।
2. आंध्र प्रदेश – आंध्र प्रदेश दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है, जिसका वार्षिक उत्पादन लगभग 1.2 मिलियन मीट्रिक टन है। यहां उपजाऊ तटीय क्षेत्रों में केंद्रित एक समृद्ध आम उद्योग है। लोकप्रिय किस्मों में बंगनापल्ली और नीलम आम शामिल हैं।
3. बिहार – बिहार अनुमानित 800,000 मीट्रिक टन वार्षिक उपज के साथ तीसरा सबसे बड़ा आम उत्पादक राज्य बन गया है। प्रमुख खेती क्षेत्र उपजाऊ गंगा के मैदानों के आसपास स्थित हैं, जहां देशी आम की किस्म प्रमुख है।
4. कर्नाटक – कर्नाटक में वार्षिक आम उत्पादन लगभग 750,000 मीट्रिक टन है, जो इसे चौथा सर्वाधिक उत्पादन वाला राज्य बनाता है। कोंकण क्षेत्र मुख्य रूप से घरेलू और वैश्विक बाजारों के लिए प्रसिद्ध अल्फांसो किस्म की खेती करता है।
5. महाराष्ट्र – भारत के कुल आम उत्पादन में महाराष्ट्र प्रतिवर्ष लगभग 600,000 टन का योगदान देता है। तटीय रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों में उगाए जाने वाले बहुमूल्य अल्फांसो आम को वैश्विक ख्याति प्राप्त है।
5. जम्मू-कश्मीर के किसानों के लिए खुशखबरी: धान और मक्का की फसल पर मिलेगा बीमा कवर, अंतिम तारीख 31 जुलाई
जम्मू-कश्मीर के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। खरीफ 2025 सीजन के लिए धान और मक्का की फसलें अब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत बीमा सुरक्षा के दायरे में आ गई हैं। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने इसके लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2025 तय की है। पूरी खबर पढ़े….
6. दाल उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के आसार, 2034 तक बढ़ेगा 80 लाख टन: रिपोर्ट
भारत में दाल उत्पादन को लेकर अच्छी खबर सामने आई है। आने वाले 10 साल में भारत में दालों का उत्पादन करीब 80 लाख टन बढ़ने का अनुमान है। यह जानकारी OECD-FAO एग्रीकल्चर आउटलुक 2025–2034 की ताजा रिपोर्ट में दी गई है। फिलहाल भारत में हर साल 25.2 मिलियन टन से ज्यादा दालों का उत्पादन होता है,

रिपोर्ट के अनुसार, 2034 तक दुनिया में कुल दाल उत्पादन में 2.6 करोड़ टन की बढ़ोतरी होगी। इसमें से करीब 40 फीसदी योगदान एशियाई देशों का होगा, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा भारत का रहेगा। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल उत्पादक देश है।
हाईब्रिड बीज और सरकारी योजनाओं का असर
दाल उत्पादन बढ़ाने के लिए भारत सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं। किसानों को बेहतर उत्पादन देने वाले हाईब्रिड बीज दिए जा रहे हैं, खेती में मशीनों का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के जरिये किसानों को फसल का अच्छा दाम मिल रहा है। इसके अलावा केंद्र सरकार और कुछ राज्य सरकारें भी दालों की खरीद के लिए योजनाएं चला रही हैं, हालांकि गेहूं और चावल जितना व्यापक दायरा अभी नहीं है।
इंटरक्रॉपिंग से भी बढ़ेगा उत्पादन
रिपोर्ट के मुताबिक दालों की पैदावार बढ़ाने में इंटरक्रॉपिंग यानी दो या ज्यादा फसलों को साथ बोने का तरीका भी अहम भूमिका निभाएगा। खासकर एशिया और अफ्रीका में जहां छोटे किसान खेती करते हैं, वहां दालों के साथ अनाज बोने का चलन तेजी से बढ़ेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि दालों की पैदावार बढ़ेगी लेकिन अभी भी अनाज और तिलहनों के मुकाबले इसकी रफ्तार थोड़ी कम रहेगी क्योंकि दालों पर रिसर्च और सुविधाएं सीमित हैं।
दुनिया में बढ़ेगी दालों की मांग
OECD-FAO रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले समय में लोगों के खाने में दालों का इस्तेमाल बढ़ेगा। 2034 तक प्रति व्यक्ति सालाना दाल की खपत औसतन 8.6 किलो तक पहुंच सकती है।
व्यापार में भी दिखेगा इजाफा
पिछले 10 सालों में दुनिया में दालों का व्यापार 1.4 करोड़ टन से बढ़कर 2 करोड़ टन हो चुका है। यह 2034 तक 2.3 करोड़ टन तक पहुंच सकता है। कनाडा दालों का सबसे बड़ा निर्यातक बना रहेगा, जहां से निर्यात 4.9 मिलियन टन से बढ़कर 5.7 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान है। ऑस्ट्रेलिया और रूस भी बड़े निर्यातक रहेंगे।
कीमतों को लेकर क्या है अनुमान?
रिपोर्ट में बताया गया है कि दालों की कीमतों में 2025 में थोड़ी गिरावट आ सकती है, लेकिन अगले कुछ सालों में इनमें हल्की बढ़त देखने को मिल सकती है। हालांकि वास्तविक कीमतों में कमी का रुख जारी रहेगा।
किसानों को होगा फायदा
कुल मिलाकर आने वाले समय में भारत में दाल उत्पादन में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और देश की आयात पर निर्भरता भी घटेगी। साथ ही लोगों की थाली में पोषण बढ़ेगा और देश की खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी।
7. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से दिल्ली में राजस्थान के कृषि मंत्री ने की भेंट
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से आज कृषि भवन, नई दिल्ली में राजस्थान के कृषि, बागवानी एवं ग्रामीण विकास मंत्री डा. किरोड़ीलाल मीणा ने मुलाकात की। श्री मीणा ने बैठक में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह को राजस्थान में की गई नकली बीज-खाद संबंधी कार्रवाई की रिपोर्ट दी, साथ ही उनसे कृषि एवं ग्रामीण विकास को लेकर अन्य विषयों पर भी चर्चा की।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से आज कृषि भवन, नई दिल्ली में राजस्थान के कृषि, बागवानी एवं ग्रामीण विकास मंत्री डा. किरोड़ीलाल मीणा ने मुलाकात की। श्री मीणा ने बैठक में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह को राजस्थान में की गई नकली बीज-खाद संबंधी कार्रवाई की रिपोर्ट दी, साथ ही उनसे कृषि एवं ग्रामीण विकास को लेकर अन्य विषयों पर भी चर्चा की। इस दौरान शिवराज सिंह ने कहा कि नकली बीज-खाद एवं पेस्टीसाइड को लेकर वे अत्यंत गंभीर है और इस संबंध में सख्त से सख्त कार्रवाई के लिए तत्संबंधी कानून को कड़ा बनाया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया भी प्रारंभ की जा चुकी है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि इस बारे में उन्होंने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र भी भेजकर कार्रवाई करने को कहा है, केंद्र सरकार किसानों के साथ धोखा नहीं होने देगी, गड़बड़ियां करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
8. जूनागढ़ में खेतों में उतरे कृषि मंत्री शिवराज: किसानों से किया संवाद, मूंगफली कि खास किस्म पर की चर्चा
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुजरात दौरे के दौरान किसानों से सीधा संवाद किया। अपने दौरे में वह जूनागढ़ जिले के मानेकवाड़ा गांव पहुंचे, जहां उन्होंने मूंगफली के खेतों का दौरा किया और किसानों की खेती की प्रक्रिया को नजदीक से देखा।
किसानों ने कृषि मंत्री को मूंगफली की खेती में आने वाली विभिन्न समस्याओं के बारे में बताया। उन्होंने मौसमी चुनौतियों, फसल के बाजार मूल्य में उतार-चढ़ाव और सिंचाई की दिक्कतों के बारे में खुलकर बात की। किसानों के सुझावों और समस्याओं को सुनते हुए मंत्री ने उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
मूंगफली की गिरनार-4 किस्म पर हुई खास चर्चा
श्री चौहान ने विशेष रूप से गुजरात की मशहूर मूंगफली किस्म ‘गिरनार-4’ की विशेषताओं के बारे में अधिकारियों से जानकारी ली। गिरनार-4 किस्म को उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जाना जाता है। मंत्री ने इस किस्म को किसानों तक तेजी से पहुंचाने पर जोर दिया।
ड्रोन और आधुनिक उपकरणों का निरीक्षण
कृषि मंत्री ने खेत में उपलब्ध ड्रोन और आधुनिक कृषि यंत्रों का निरीक्षण भी किया। उन्होंने किसानों से इन तकनीकी उपकरणों के उपयोग और उनके फायदे के बारे में बात की। किसानों ने बताया कि ड्रोन और आधुनिक यंत्रों से खेती में समय और लागत की बचत हो रही है।
किसानों की मेहनत की सराहना
श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि “हमारे अन्नदाता देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ हैं। उनकी मेहनत अमूल्य है। सरकार हर स्तर पर किसानों के साथ खड़ी है और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।” कृषि मंत्री ने भरोसा दिलाया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को आधुनिक बनाने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं।
9. पशुपालकों के लिए जरूरी खबर: भारत सरकार ने 18 एंटीबायोटिक समेत 37 दवाओं पर लगाया बैन, नई गाइडलाइन जारी
भारत सरकार ने पशुपालकों के लिए एक अहम फैसला लिया है। अब पशुओं के इलाज में कई तरह की दवाओं के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। खासतौर पर डेयरी पशु, अंडा देने वाले पक्षी और मधुमक्खी पालन में कुछ दवाओं का उपयोग पूरी तरह बैन कर दिया गया है। इस कदम का मकसद पशुओं और इंसानों दोनों के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना है।
सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, दूध देने वाले पशुओं (गाय-भैंस), अंडा देने वाले पक्षियों, मधुमक्खियों और उन जानवरों (बकरी, भेड़, सुअर) के इलाज में इन दवाओं का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, जिनसे आंत निकालकर खाद्य या अन्य उत्पाद तैयार होते हैं।
कुल 37 दवाएं बैन
इस नए नियम के तहत कुल 37 दवाओं पर रोक लगाई गई है। इनमें 18 एंटीबायोटिक, 18 एंटीवायरल और 1 एंटी-प्रोटोज़ोन दवा शामिल हैं। इन दवाओं का इस्तेमाल इन पशुओं के किसी भी इलाज, पालन-पोषण, या किसी भी उत्पादन प्रक्रिया में पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
वजन बढ़ाने के लिए दवा देना भी बैन
सरकार ने साफ किया है कि किसी भी जानवर में वजन या उत्पादन बढ़ाने के लिए एंटीमाइक्रोबियल दवाओं (Antimicrobial drugs) का उपयोग करना गैरकानूनी होगा। मतलब अब कोई भी किसान या व्यापारी इन दवाओं से जानवरों का वजन या उत्पादन नहीं बढ़ा सकेगा।
क्यों लिया गया फैसला?
सरकार का कहना है कि इन दवाओं के अत्यधिक उपयोग से पशुओं में दवा प्रतिरोधक क्षमता (Antibiotic Resistance) बढ़ती है, जो इंसानों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक हो सकता है। साथ ही शुद्ध दूध, शहद और मांस का उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए ये कदम उठाया गया है।
कहां-कहां लागू होगा नियम?
यह आदेश उन सभी फार्म, डेयरी, पोल्ट्री, मधुमक्खी पालन और मीट प्रोसेसिंग यूनिट में लागू होगा, जहां इन जानवरों को पाला जाता है या उनके उत्पाद तैयार होते हैं।
पशुपालकों के लिए सलाह
अगर आप पशुपालन करते हैं तो सावधानी बरतें। किसी भी दवा का उपयोग करने से पहले पशु चिकित्सक से सलाह जरूर लें। नई नियमावली का पालन करें ताकि आपके उत्पाद सुरक्षित रहें और किसी कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।
10. किसानों के लिए जरूरी अलर्ट! PM किसान योजना को लेकर वायरल हो रहे झूठे मैसेज, सरकार ने जारी की चेतावनी
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने किसानों के हित में एक अहम चेतावनी जारी की है। मंत्रालय ने साफ किया है कि पीएम किसान योजना को लेकर सोशल मीडिया पर कई फर्जी सूचनाएं और झूठे मैसेज वायरल हो रहे हैं, जिनसे किसान भाइयों और बहनों को सावधान रहने की जरूरत है।
किसानों को सरकार ने दी जरूरी सलाह
1. केवल PM Kisan की आधिकारिक वेबसाइट https://pmkisan.gov.in/ पर ही भरोसा करें।
2. कोई भी अपडेट या जानकारी सिर्फ @pmkisanofficial आधिकारिक सोशल मीडिया पेज से ही प्राप्त करें।
3. किसी भी अनजान लिंक, कॉल या मैसेज पर कोई प्रतिक्रिया न दें। आपकी व्यक्तिगत जानकारी और बैंक डिटेल कभी किसी को न दें।
क्यों जरूरी है सतर्क रहना?
1. कई साइबर ठग किसानों को फर्जी संदेश भेजकर खाते की जानकारी मांगते हैं।
2. पीएम किसान की असली किस्त सीधे बैंक खाते में आती है, किसी भी व्यक्ति या एजेंसी को पैसे भेजने की जरूरत नहीं होती।
3. समय-समय पर सरकार इस योजना से जुड़ी अपडेट आधिकारिक पोर्टल और सोशल मीडिया पर ही जारी करती है।
किसानों के लिए जरूरी संदेश
सरकार ने दोहराया है कि आपकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रहे, इसके लिए जागरूक रहना बेहद जरूरी है। किसी भी धोखाधड़ी से बचें और अफवाहों से दूरी बनाए रखें। ज्यादा जानकारी के लिए सिर्फ सरकारी पोर्टल और ऑफिशियल सोशल मीडिया पर भरोसा करें।




