मौसम केंद्र, भोपाल से मिली जानकारी के अनुसार पिछले 24 घंटों के दौरान, मध्य प्रदेश के इंदौर, नर्मदा पुरम, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल, रीवा, सागर संभागों के जिलों में कहीं- कही;भोपाल, जबलपुर संभागों के जिलों में कुछ स्थानों पर; शहडोल संभाग के जिलों में अनेक स्थानों पर वर्षा दर्ज़ की गई एवं शेष सभी संभागों के जिलों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहा।

वर्षा के प्रमुख आंकड़े ( मि मी में ) – ब्यावरा 61.4, अरेरा हिल्स 57.8, तराना 54.0, केसली 53.1, देवेंद्र नगर 47.0, पचोर 45.0, डिंडोरी 41.1, तेन्दु खेड़ा- नरसिंह पुर 38.0, सोहागपुर-शहडोल 34.0, बजाग 33.0, नरसिंह गढ़ 33.0, मझौली 30.4, चितरंगी 29.2, देवास 28.0, पीथमपुर 28.0, करांजिया 26.2, मकसूदनगढ़ 26.0, अमरकंटक 25.2, बि रसा 25.2, अमरपुर 24.2, मेहंदवानी 23.2, मवई 22.8, बिजाडांडी 22.1, सांवेर 20.3, शमशाबाद 20.0, सिवनी 19.4, रामनगर 19.1, इंदौर 19.0, भाभरा 18.2, मोहगांव 18.2, समनापुर 18.0, खजुराहो-एयर पोर्ट 17.4, पना गर 17.4, आरोन 17.0, सीधी 16.2, बड़वारा 15.0, देपालपुर 14.8, गोटेगांव 14.0, मंडला 13.2, नौरोजाबाद 12.6, सिरोंज 12.0, वेंकट नगर 11.5, छतरपुर 11.3,मलाजखंड 11.0, चन्नोड़ी 11.0, उमरिया 10.5, कोलार 10.0, टोंकखुर्द 10.0, बुढ़ार 10.0, कोलारस 10.0, करकेली 8.9, पुष्पराजगढ़ 8.6, बिछिया 8.4, राणापुर 8.1, अशोकनगर 8.0, सोनकच्छ 8.0, शाहपुरा – डिंडोरी 8.0, सीहोर 7.5, जयतपुर 7.0, विदिशा 7.0, गुलाबगंज 7.0, बहोरीबंद 6.8, उज्जैन 6.8, मटीयारी 6.0, गाडरवारा 6.0, पांढुर्ना 6.0, देवरी- सागर 6.0, गौतमपुरा 5.6, बेनीबारी 5.4, करेरा 5.1, रायपुर कर्चुलियान 5.0 मि मी वर्षा दर्ज़ की गई। खजुराहो-45, उज्जैन -44 और सागर में -41 ( कि मी / घंटा ) कि रफ्तार से झोंकेदार हवाएं / आंधी चली। जबलपुर संभाग छिंदवाड़ा को छोड़कर), शहडोल संभाग, भोपाल संभाग और गुना, शि वपुरी, अशोकनगर, भीड़ , उज्जैन , देवास, इंदौर, धार, अलीराजपुर, झाबुआ,बड़वानी, नर्मदा पुरम, सागर, दमोह, छतरपुर, पन्ना , मैहर, रीवा, सीधी और सिंगरौली जिले में वज्रपात / झंझावात के साथ वर्षा हुई। 1 जून से 22 जुलाई तक दीर्घावधि औसत से मप्र में 52 % अधिक वर्षा हुई है। पूर्वी मप्र में औसत से 68 % तथा पश्चिमी मप्र में औसत से 36 % अधिक वर्षा हुई है।
मौसमी परिस्थितियां – मानसून ट्रफ समुद्र तल पर श्रीगंगानगर, रोहतक, लखनऊ, वाराणसी, डाल्टनगंज,जमशेदपुर, कोंटाई से होकर पूर्व की ओर उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी तक जा रही है। एक ऊपरी हवा का चक्रवातीय परिसंचरण दक्षिणी छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों पर सक्रिय है । एक अन्य चक्रवातीय परिसंचरण उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश और उसके आसपास स्थित है। अगले 24 घंटों के दौरान उत्तरी बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक चक्रवातीय परिसंचरण ( उष्णकटिबंधीय चक्रवात विफा का अवशेष) आने की संभावना है। इसके प्रभाव से, अगले 48 घंटों में उसी क्षेत्र में एक निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है।
पूर्वानुमान – मौसम केंद्र ने आगामी 24 घंटों के लिए जो पूर्वानुमान जारी किया है उसके अनुसार नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, अनुपपुर, डिंडोरी , छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट और पांढुर्ना जिलों में कहीं -कहीं झंझावात / वज्रपात के साथ भारी वर्षा का येलो अलर्ट जारी किया गया है। अलीराजपुर, झाबुआ और धार जिलों में कुछ स्थानों पर ,भोपाल, विदिशा , रायसेन, सि होर, राजगढ़, खरगोन , बड़वानी, शाजापुर, आगर, मंदसौर, नीमच, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर , दतिया , भिंड , मुरैना, श्योपुर कलां, सिंग रौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, उमरिया , कटनी, जबलपुर,नरसिंहपुर, पन्ना , दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर जिलों में अनेक स्थानों पर तथा नर्मदा पुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, इंदौर, रतलाम, उज्जैन , देवास, अनुपपुर, शहडोल, डिंडोरी , छिंदवाड़ा,सिवनी, मंडला, बालाघाट और पांढुर्ना जिलों में अधिकांश स्थानों पर वर्षा या गरज चमक के साथ बौछारें पड़ेंगी। मध्य प्रदेश के अधिकांश जिलों में कहीं -कहीं झंझावात / वज्रपात का येलो अलर्ट जारी किया गया है।
बिहार में ड्रिप-स्प्रिंकलर योजना के लिए ₹140 करोड़ मंजूर
बिहार सरकार ने किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा देने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई योजना के तहत ₹140 करोड़ 66 लाख रुपये (140.66 करोड़) की राशि स्वीकृत की है। इस योजना का उद्देश्य किसानों की सिंचाई लागत घटाना, पानी की बचत करना और खेती में उत्पादन बढ़ाना है।
‘प्रति बूंद अधिक फसल’ का लक्ष्य
बिहार के उपमुख्यमंत्री और कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे जल की बचत के साथ किसानों की आमदनी में भी इजाफा होगा।
छोटे किसानों को मिलेगा सबसे ज्यादा लाभ
योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को सबसे ज्यादा लाभ दिया जाएगा। ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाने पर छोटे और सीमांत किसानों को लागत का 80% अनुदान और अन्य किसानों को 70% अनुदान मिलेगा। पोर्टेबल स्प्रिंकलर प्रणाली पर छोटे किसानों को 55% और अन्य किसानों को 45% सब्सिडी का लाभ मिलेगा।
इसके अलावा, नलकूप या सबमर्सिबल पंप लगाने पर अधिकतम ₹40,000 तक का अनुदान मिलेगा। वहीं, तालाब या कुएं के निर्माण पर लागत का 50%, अधिकतम ₹75,000 तक
प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान भी शुरू
कृषि मंत्री ने बताया कि योजना का लाभ ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचे इसके लिए प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे। किसानों को बताया जाएगा कि ड्रिप-स्प्रिंकलर तकनीक से 60% तक जल की बचत और 25-35% तक उत्पादन में वृद्धि संभव है।
जल प्रबंधन और आय वृद्धि की दिशा में बड़ा कदम
सरकार का मानना है कि यह योजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है बल्कि यह जल प्रबंधन में सुधार, खेती की लागत घटाने और किसानों की आय बढ़ाने का बड़ा कदम है। कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक किसान इस योजना का लाभ लें और आधुनिक, वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल खेती करें।
छत्तीसगढ़ में कृषि मंत्री ने 664 लाख की विकास योजनाओं का किया ऐलान
छत्तीसगढ़ के कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम ने बलरामपुर जिले के ग्राम जाबर में आयोजित किसान सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कुल 664 लाख 43 हजार रुपये की लागत से बनने वाले 31 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया।
इस कार्यक्रम में श्री नेताम ने राज्य कृषि विपणन मंडी बोर्ड अंतर्गत विकासखंड बलरामपुर के विभिन्न ग्राम पंचायतों में सीसी रोड के 28 और पुल-पुलिया निर्माण के 3 कार्यों सहित कुल 31 कार्यों की सौगात दी। इनमें से 21 कार्यों का भूमिपूजन हुआ जिसकी लागत 408.72 लाख रुपये है। वहीं 10 कार्यों का लोकार्पण किया गया जिनकी लागत 255.71 लाख रुपये है।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में लगाया पौधा
कृषि मंत्री ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत आम का पौधा भी रोपा। इस मौके पर विभिन्न योजनाओं के तहत हितग्राहियों को सामग्री का वितरण भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के 8 किसानों को सम्मानित किया गया। कृषि विभाग की ओर से 20 किसानों को रामतिल बीज का वितरण किया गया।
उद्यान विभाग ने 67 किसानों को पौधे वितरित किए। मत्स्य विभाग की ओर से एक किसान को कोल्ड बॉक्स दिया गया। वन विभाग द्वारा 10 महिलाओं को चरण पादुका दी गई। इसके अलावा स्वेच्छानुदान राशि के चेक का भी वितरण किया गया।
प्राकृतिक खेती पर जोर, पुस्तक का विमोचन
इस अवसर पर श्री नेताम ने प्राकृतिक खेती और फसल प्रबंधन पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती को अपनाने और फसल विविधीकरण के लिए प्रेरित किया। कृषि मंत्री नेताम ने सम्मेलन में कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के हितों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में किसानों के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार कार्य हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार किसान क्रेडिट कार्ड और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से अधिक से अधिक किसानों को लाभ पहुंचा रही है। धान की खरीद में समर्थन मूल्य को हर साल बढ़ाया जा रहा है ताकि किसानों को उनकी उपज का पूरा दाम मिल सके।
कृषि विविधीकरण पर जोर
मंत्री श्री नेताम ने कहा कि किसान धान के अलावा मोटा अनाज, दलहन और तिलहन की खेती पर भी ध्यान दें ताकि कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने डीएपी के विकल्पों के उपयोग की भी सलाह दी।
उन्होंने बताया कि तेंदूपत्ता संग्राहकों को सीधे डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से खाते में राशि दी जा रही है, जिससे पारदर्शिता बनी हुई है और किसानों को सीधे लाभ मिल रहा है। अंत में मंत्री श्री नेताम ने कहा कि डिजिटल क्रांति के कारण शासन की सभी योजनाएं पारदर्शी तरीके से अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही हैं। किसानों के हित में सरकार हरसंभव कदम उठा रही है।